भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में 20 मार्च 2026 को समाप्त सप्ताह के दौरान $11.41 अरब की तेज गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर $698.346 अरब रह गया। Reserve Bank of India के अनुसार यह लगातार दूसरे सप्ताह की गिरावट है, जिसका मुख्य कारण सोने के भंडार (Gold Reserves) में भारी कमी रही। इससे पहले फरवरी 2026 में भंडार $728.494 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव जैसी वैश्विक अनिश्चितताओं का असर अब साफ दिखाई दे रहा है।
हाल ही में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने उच्चतम स्तर हासिल किया था, जो मजबूत बाह्य क्षेत्र और पूंजी प्रवाह को दर्शाता है।
लेकिन वर्तमान गिरावट यह दिखाती है कि वैश्विक घटनाएं कितनी तेजी से रिजर्व को प्रभावित कर सकती हैं।
यह संकेत देता है कि यह केवल एक बार की गिरावट नहीं, बल्कि एक ट्रेंड बन सकता है।
इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण सोने के भंडार में कमी है:
सोने की कीमतें वैश्विक परिस्थितियों, ब्याज दरों और मुद्रा विनिमय दरों से प्रभावित होती हैं। चूंकि रिजर्व डॉलर में आंका जाता है, इसलिए कीमतों में बदलाव सीधे कुल भंडार को प्रभावित करता है।
हालांकि कुल भंडार घटा है, लेकिन विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) में वृद्धि देखी गई:
इनमें अमेरिकी डॉलर, यूरो, पाउंड और येन जैसी प्रमुख मुद्राएं शामिल होती हैं। इनका मूल्य विनिमय दरों के अनुसार बदलता है।
ये भंडार का छोटा हिस्सा हैं, लेकिन तरलता (liquidity) बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विदेशी मुद्रा भंडार में यह गिरावट मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितता से जुड़ी है।
ऐसी परिस्थितियों में:
देखने को मिलते हैं, जो अंततः भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को प्रभावित करते हैं।
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