UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर में शामिल दीपावली

भारत के लिए एक गर्वपूर्ण सांस्कृतिक क्षण में, दीपावली—प्रकाश और आशा का प्रतीक यह प्रतिष्ठित त्योहार—को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची 2025 में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। यह मान्यता भारत और विश्वभर के भारतीय प्रवासी समुदाय द्वारा मनाए जाने वाले इस त्योहार की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक महत्ता को पुष्टि करती है। यूनेस्को का यह निर्णय भारत की जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं को वैश्विक मंच पर अधिक दृश्यता प्रदान करता है और तेजी से बदलती दुनिया में उनकी निरंतर प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।

पृष्ठभूमि: यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची क्या है?

यूनेस्को की यह सूची उन परंपराओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से बनाई गई है जो पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित होती हैं। इनमें शामिल हैं—मौखिक परंपराएँ, प्रदर्शन कलाएँ, सामाजिक रीति-रिवाज़ और त्यौहार, अनुष्ठान, प्रकृति एवं ब्रह्मांड संबंधी पारंपरिक ज्ञान, तथा हस्तशिल्प। इसका उद्देश्य सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखना, जन-जागरूकता बढ़ाना और विभिन्न जीवन-शैलियों के प्रति वैश्विक सम्मान विकसित करना है।

दीपावली के चयन का कारण

दीपावली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि एक जीवित विरासत है जो अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय के सार्वभौमिक संदेश को प्रसारित करती है। इसके अंतर्गत—विभिन्न क्षेत्रों की पूजा-परंपराएँ, सामुदायिक उत्सव, पारिवारिक जमावड़े, हस्तशिल्प और पारंपरिक भोजन, दीयों का प्रज्ज्वलन तथा सद्भावना और समावेशन जैसे मूल्यों की अभिव्यक्ति—इसे यूनेस्को के मानदंडों के अनुरूप एक जीवंत, समावेशी और समाज-आधारित विरासत बनाते हैं।

यूनेस्को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची 2025

2025 की सूची में कुल 20 सांस्कृतिक तत्व शामिल किए गए, जिनमें दीपावली भी है। प्रमुख प्रविष्टियों में अफगानिस्तान की बेहज़ाद शैली की मिनिएचर कला, कतर और खाड़ी देशों की बिश्त परंपरा, अर्जेंटीना का क्वार्तेतो संगीत, मिस्र का कोशरी व्यंजन, बेल्जियम की कठपुतली परंपरा, और बांग्लादेश की तांगाइल साड़ी बुनाई शामिल हैं।

दीपावली की सूची में सम्मिलित होने का महत्व

दीपावली का शामिल होना भारत की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर को वैश्विक स्तर पर सुदृढ़ करता है। यह इसके सार्वभौमिक संदेश—सद्भाव, नव-आरंभ और सकारात्मकता—को मान्यता देता है। इससे दीपावली से जुड़ी परंपराओं जैसे—रंगोली, दीया-निर्माण, कथावाचन, लोक अनुष्ठान और अन्य पारंपरिक गतिविधियों—को संरक्षण तथा प्रोत्साहन मिलता है। यह भारत को भविष्य में अधिक सांस्कृतिक परंपराएँ सूचीबद्ध कराने में भी मजबूती प्रदान करता है।

स्थिर जानकारी

  • नई भारतीय प्रविष्टि (2025): दीपावली

  • सूची का नाम: यूनेस्को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची

  • उद्देश्य: जीवित सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण

  • भारत की अन्य प्रविष्टियाँ: दुर्गा पूजा, कुंभ मेला, वैदिक chanting, रामलीला, कुटियाट्टम, छऊ नृत्य, कालबेलिया आदि

  • 2025 में बांग्लादेश की नई प्रविष्टि: तांगाइल साड़ी बुनाई

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vikash

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