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भारतीय रेलवे 2030 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जक बन जाएगा

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केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में कहा कि भारतीय रेलवे ने 2030 तक ‘शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जक’ बनने का लक्ष्य रखा है। रेलवे इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को दो चरणों में हासिल करने की योजना बना रहा है: दिसंबर 2023 तक इलेक्ट्रिक ट्रेनों में पूर्ण परिवर्तन और 2030 तक मुख्य रूप से गैर-नवीकरणीय स्रोतों के माध्यम से ट्रेनों और स्टेशनों को बिजली देना।

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रेल मंत्री अश्‍व‍िनी वैष्णव ने भारतीय रेलवे को 2030 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जक बनने का लक्ष्य रखा है। रेलवे मंत्री ने कहा क‍ि 2029-30 में रेलवे की ऊर्जा की जरूरत करीब 8,200 मेगावाट होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन हासिल करने के लिए 2029-30 तक नवीकरणीय क्षमता की अपेक्षित आवश्यकता लगभग 30 हजार मेगावाट होगी। उन्‍होंने कहा, पिछले महीने की स्थिति के अनुसार, लगभग 147 मेगा वाट के सौर संयंत्र, दोनों छतों और जमीन पर और लगभग 103 मेगा वाट पवन ऊर्जा संयंत्र चालू किए गए हैं।

 

रेल मंत्री ने बताया आगे करीब 2150 मेगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता का समझौता किया गया है। मंत्री ने कहा कि इसके अलावा, रेलवे ने अपनी भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए विभिन्न बिजली खरीद मोड से अक्षय ऊर्जा की आगे भी खरीद करने की योजना बनाई है।

 

भारतीय रेलवे: नेट जीरो कार्बन उत्सर्जक का महत्व:

 

इस कदम से भारत को 2030 तक अपने कार्बन उत्सर्जन को 33 प्रतिशत तक कम करने के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान को पूरा करने में मदद मिलेगी, क्योंकि परिवहन पर्याप्त शमन क्षमता वाला एक प्रमुख क्षेत्र है।

 

रतीय रेलवे: पूर्ण विद्युतीकरण:

 

2014 से, रेलवे ने डीजल कोचों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और ब्रॉड गेज रेलवे पटरियों के विद्युतीकरण की गति पकड़ी। यह दिसंबर 2023 तक एक विद्युतीकृत रेल नेटवर्क में पूरी तरह से परिवर्तन करने की योजना बना रहा है।

रेलवे की वार्षिक डीजल खपत 2020-21 (जनवरी 2021 तक) में घटकर 1,092 मिलियन लीटर रह गई है, जो 2018-19 में 3,066 मिलियन लीटर थी।

साफ-सुथरा होने के अलावा, डीजल कोचों का फेजआउट आर्थिक समझ में आता है, क्योंकि देश अपने अधिकांश ईंधन का आयात करता है।

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FAQs

भारतीय रेल का जनक कौन है?

रेलवे के जनक जॉर्ज स्टीफेंसन को माना जाता है।

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