भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को एक बड़ा बढ़ावा देते हुए भारतीय सेना ने लद्दाख में 15,000 फीट की ऊँचाई पर आकाश प्राइम वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली का सफल परीक्षण किया। यह महत्वपूर्ण परीक्षण भारत की उच्च ऊंचाई पर युद्ध क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्नत सीकर (seeker) और सटीकता से लक्ष्य भेदने की क्षमता से लैस आकाश प्राइम संस्करण, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों में तकनीकी प्रगति का प्रतीक है और रणनीतिक सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक प्रभावी साधन साबित हुआ है।
आकाश प्राइम, मूल आकाश मिसाइल प्रणाली का उन्नत संस्करण है, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। यह मध्यम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है, जिसे पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर हवाई खतरों से सुरक्षा के लिए भारतीय थल सेना और वायु सेना द्वारा व्यापक रूप से तैनात किया गया है। आकाश प्राइम संस्करण में उच्च ऊंचाई पर संचालन की क्षमता और सटीक लक्ष्य भेदन की विशेषताएं जोड़ी गई हैं, जो इसे अधिक प्रभावशाली बनाती हैं।
लद्दाख जैसे दुर्गम और कम ऑक्सीजन वाले क्षेत्र में इस प्रणाली का सफल परीक्षण एक बड़ी उपलब्धि है। सेना की वायु रक्षा कोर द्वारा DRDO के वैज्ञानिकों के सहयोग से किए गए इस परीक्षण में, मिसाइल ने तेज गति से उड़ते हवाई लक्ष्यों पर प्रत्यक्ष प्रहार किया। यह प्रणाली भारत की उच्च ऊंचाई पर संघर्ष की स्थिति में तत्परता को मजबूत करती है, खासकर लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) और लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में।
आकाश प्राइम को पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तैनात किया गया था। यह भारतीय सेना का एक रणनीतिक अभियान था, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन हमलों और संघर्ष विराम उल्लंघनों को रोकना था। यह ऑपरेशन 8–9 मई 2025 की रात को हुआ था, जिसमें 50 से अधिक ड्रोन नष्ट किए गए। इस दौरान आकाश प्राइम ने चीनी मूल के विमानों और तुर्की निर्मित ड्रोनों के खिलाफ वास्तविक समय में अपनी मारक क्षमता साबित की।
आकाश प्राइम में अत्याधुनिक सीकर लगा है जो हर मौसम में लक्ष्य की सटीक पहचान और ट्रैकिंग सुनिश्चित करता है। यह प्रणाली एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बना सकती है, जिसमें फेज़्ड ऐरे रडार और कमांड गाइडेंस तकनीक का उपयोग होता है। इसे स्वायत्त और समूह मोड में उपयोग किया जा सकता है, जिससे यह विभिन्न इलाकों में आसानी से तैनात की जा सकती है। यह 360-डिग्री सुरक्षा प्रदान करती है और सैन्य प्रतिष्ठानों व चलती सैन्य टुकड़ियों की रक्षा के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।
आकाश प्राइम का विकास और परीक्षण आत्मनिर्भर भारत अभियान के रक्षा क्षेत्र से जुड़े लक्ष्यों के अनुरूप है। इस सफलता के बाद, आकाश वायु रक्षा प्रणाली की तीसरी और चौथी रेजीमेंट्स में उन्नत संस्करण की तैनाती की योजना है। इससे भारत की बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली और अधिक सशक्त होगी और आधुनिक हवाई खतरों से निपटने की राष्ट्रीय क्षमता को बल मिलेगा।
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