भारतीय सेना की कोणार्क कोर के अंतर्गत आने वाली “ब्लेज़िंग स्काईज़ ब्रिगेड” के एयर डिफेंस वॉरियर्स ने स्ट्रेला-10 (VSHORADS) का पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में उच्च-तीव्रता परीक्षण सफलतापूर्वक किया। राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में आयोजित इस लाइव अभ्यास ने कम ऊँचाई पर आने वाले हवाई खतरों से निपटने में सेना की मजबूत युद्धक तत्परता और परिचालन सटीकता का प्रदर्शन किया। यह अभ्यास वायु रक्षा क्षमताओं को और सुदृढ़ करने तथा वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सिमुलेटेड लक्ष्यों पर सटीक प्रहार
BMP आधारित मोबाइल प्लेटफॉर्म से दागी गई स्ट्रेला-10 मिसाइल ने सिमुलेटेड दुश्मन हवाई लक्ष्यों पर सीधे और सटीक प्रहार किए। लगभग 6 से 10 किलोमीटर की प्रभावी मारक क्षमता वाला यह सिस्टम कम ऊँचाई पर उड़ने वाले विमानों, हेलीकॉप्टरों और आधुनिक हवाई खतरों जैसे ड्रोन को निष्क्रिय करने में सक्षम है। अधिकारियों के अनुसार, इस अभ्यास ने फायरिंग मानकों की पुष्टि की, क्रू के बीच समन्वय को मजबूत किया तथा वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में लक्ष्य भेदन प्रक्रियाओं का परीक्षण किया।
अभ्यास की प्रमुख विशेषताएँ
अभ्यास के दौरान निगरानी और लक्ष्य अधिग्रहण प्रणालियों का निर्बाध एकीकरण प्रदर्शित किया गया। रेगिस्तानी परिस्थितियों में सटीक मिसाइल प्रक्षेपण, उच्च स्तर की फायर अनुशासन (Fire Discipline) और सामरिक दक्षता का प्रदर्शन किया गया। अत्यधिक तापमान और बदलती रेत जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में परीक्षण ने सैनिकों की परिचालन क्षमता को परखा। रडार-आधारित प्रणालियों के विपरीत, स्ट्रेला-10 मुख्य रूप से दृश्य लक्ष्य अधिग्रहण (Visual Target Acquisition) पर निर्भर करता है, जिससे प्रशिक्षण और युद्धक्षेत्र जागरूकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
सामरिक महत्व
पोखरण का रेगिस्तानी क्षेत्र चुनौतीपूर्ण वातावरण प्रदान करता है, जिससे वायु रक्षा इकाइयों की वास्तविक युद्ध स्थितियों के लिए तैयारी सुनिश्चित होती है। भारतीय सेना में स्ट्रेला-10 अभी भी सक्रिय सेवा में है, साथ ही भारत लगभग 6 किलोमीटर मारक क्षमता वाले स्वदेशी VSHORADS सिस्टम का भी विकास कर रहा है, जिससे घरेलू रक्षा क्षमताओं को और सुदृढ़ किया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि विशेष रूप से सामरिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में परिचालन तत्परता बनाए रखने के लिए ऐसे अभ्यास नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। यह सफल परीक्षण विकसित होते हवाई खतरों के विरुद्ध राष्ट्रीय वायुक्षेत्र की सुरक्षा के प्रति भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


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