भारतीय वायु सेना ने पोर्टेबल हॉस्पिटल का किया सफल परीक्षण

वायु सेना ने भीष्म पोर्टेबल क्यूबस का परीक्षण किया। ये पोर्टेबल क्यूबस एक प्रकार के पोर्टेबल अस्पताल हैं। जिनकी मदद से आपातकालीन स्थिति में जरूरतमंदों की मदद के लिए जरूरी इलाज की सामग्री पहुंचाई जाएगी। वायु सेना नी आगरा में इन पोर्टेबल क्यूबस का सफल परीक्षण किया।

लगभग 1500 फीट की ऊंचाई से इस पोर्टेबल अस्पताल को जमीन पर लैंड कराया गया है। भीष्म प्रोजेक्ट को स्वास्थ्य, रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की टीम ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।

एक साथ 200 लोगों का इलाज

विमान से 1500 फीट से अधिक की दूरी से पोर्टेबल अस्पताल को दो पैराशूट के समूह से जमीन पर उतारा गया। क्यूबनुमा अस्पताल महज 12 मिनट में बनकर तैयार हो गया। यह वाटरप्रूफ और बेहद हल्का है। इसमें एक साथ 200 लोगों का इलाज किया जा सकता है। यह पहला स्वदेशी पोर्टेबल अस्पताल है। इसे ड्रोन की मदद से कहीं ले भी जा सकते हैं।

प्रोजेक्ट का उद्देश्य

पीएम मोदी के नेतृत्व में भीष्म प्रोजेक्ट शुरू किया था। प्रोजेक्ट का उद्देश्य आपदाग्रस्त अथवा युद्धग्रस्त क्षेत्र में गंभीर लोगों को जल्द इलाज उपलब्ध कराना है। मंगलवार को पोर्टेबल अस्पताल भीष्म को पैक किया गया। एक सिरे में पैराशूट का समूह बांधा गया और दूसरे सिरे में लोहे के प्लेटफॉर्म से पोर्टेबल अस्पताल को बांध दिया। मलपुरा ड्रॉपिंग जोन के आसमान से वायु सेना के विमान ने इसे नीचे फेंका। नीचे गिरने के बाद यह चेक किया जाना था कि अस्पताल कितनी देर में तैयार हो जाता है।

क्यूब महज 12 मिनट में तैयार

इस अस्पताल को वायु, भूमि या फिर समुद्र में तैयार किया जा सकता है। जमीन पर गिरते ही क्यूब महज 12 मिनट में तैयार हो गया। हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एडीआरडीई) की टीम ने पैराशूट विकसित किए हैं। इसको कहीं पर भी उतारने में दो पैराशूट का प्रयोग किया जाता है।

क्यूब केज के दो सेट

भीष्म में मास्टर क्यूब केज के दो सेट होते हैं। प्रत्येक केज में 36 मिनी क्यूब होते हैं। यह क्यूब बहुत मजबूत होने के साथ हल्के भी होते हैं। इस अस्पताल को कई बार प्रयोग में लाया जा सकता है। इसकी पैकिंग ऐसी की जाती है कि भूमि पर गिरने के बाद खुलने में कोई दिक्कत न आए।

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vikash

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