ग्लोबल मीथेन ट्रैकर 2025: प्रमुख निष्कर्ष

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) द्वारा जारी ग्लोबल मीथेन ट्रैकर 2025 रिपोर्ट वैश्विक मीथेन उत्सर्जन, विशेष रूप से ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित उत्सर्जन का व्यापक मूल्यांकन प्रस्तुत करती है। यह रिपोर्ट इस चिंताजनक प्रवृत्ति को उजागर करती है कि ऊर्जा-सम्बंधित मीथेन उत्सर्जन अब तक अपने शिखर तक नहीं पहुंचा है। जीवाश्म ईंधनों का लगातार उत्पादन और सीमित नियंत्रण उपायों के कारण वार्षिक मीथेन उत्सर्जन 120 मिलियन टन से अधिक बना हुआ है।

क्यों चर्चा में है?

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) द्वारा जारी Global Methane Tracker 2025 रिपोर्ट ने उजागर किया है कि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी मीथेन उत्सर्जन अभी भी खतरनाक रूप से ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। रिपोर्ट में पहली बार परित्यक्त तेल कुओं और खदानों से होने वाले उत्सर्जन को शामिल किया गया है। यह भी बताया गया है कि मीथेन कम करके लगभग 100 अरब घन मीटर प्राकृतिक गैस को पुनर्प्राप्त किया जा सकता है।

मुख्य बिंदु:

1. मीथेन उत्सर्जन का शिखर अभी नहीं आया है

  • ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित मीथेन उत्सर्जन अभी भी प्रति वर्ष 120 मिलियन टन (Mt) से अधिक है।

  • जीवाश्म ईंधन से लगभग 1/3 मानवजनित मीथेन उत्सर्जन होता है।

  • परित्यक्त कुओं और खदानों से वर्ष 2024 में 8 Mt उत्सर्जन हुआ।

  • पारंपरिक बायोमास से 20 Mt मीथेन उत्सर्जन होता है (विशेषकर विकासशील देशों में)।

2. जीवाश्म ईंधन क्षेत्र: त्वरित कटौती की संभावना

  • केवल 5% तेल और गैस उत्पादन ही ‘नियर-ज़ीरो मीथेन’ मानकों को पूरा करता है।

  • उत्सर्जन घटाने के उपाय मौजूद हैं और कम लागत या शून्य लागत पर संभव हैं।

  • हालांकि वैश्विक संकल्प हुए हैं, लेकिन कार्यान्वयन कमजोर और सत्यापन योग्य कटौती दुर्लभ है।

3. तेल, गैस और कोयला से मीथेन उत्सर्जन (2010–2024)

  • अपस्ट्रीम ऑयल/गैस और स्टीम कोयला अब भी प्रमुख स्रोत बने हुए हैं।

  • परित्यक्त संयंत्रों को पहली बार शामिल किया गया है, जिससे कुल उत्सर्जन बढ़ा है।

4. रिपोर्टिंग में भारी कमी

  • IEA के अनुमान, UNFCCC को दी गई देशों की रिपोर्ट से 80% अधिक हैं।

  • केवल कुछ देशों (जैसे यूरोप) ही मापन आधारित डेटा का उपयोग करते हैं।

5. सैटेलाइट्स ने छिपे हुए उत्सर्जन उजागर किए

  • अब 25+ उपग्रह मीथेन पर निगरानी कर रहे हैं।

  • 2024 में MethaneSAT और Tanager-1 जैसे उपग्रह लॉन्च हुए।

  • MethaneSAT 500 किलोग्राम/घंटा से कम उत्सर्जन वाले बिखरे स्रोतों का पता लगा सकता है।

  • 2024 में सुपर-उत्सर्जन घटनाओं का रिकॉर्ड बना (Sentinel 5P डेटा अनुसार)।

6. मीथेन संकल्पों का कमजोर क्रियान्वयन

  • लगभग 80% तेल और गैस उत्पादन कुछ कुछ मीथेन संकल्प के दायरे में है।

  • लेकिन केवल 5% उत्पादन ही कंपनियों के “नियर-ज़ीरो टारगेट” के तहत आता है।

  • कई प्रमुख उत्सर्जक देश और कंपनियां अभी तक प्रतिबद्ध नहीं हुई हैं

7. डेटा गैप और समाधान

  • रूस का उत्तरी हिस्सा, वेनेजुएला जैसे क्षेत्रों में सैटेलाइट दृश्यता कम है।

  • MMRV प्रणाली (Measurement, Monitoring, Reporting & Verification) आवश्यक है।

  • प्रभावी नीतियां:

    • लीक डिटेक्शन और मरम्मत (LDAR)

    • कम/शून्य उत्सर्जन उपकरण

    • रूटीन फ्लेयरिंग और वेंटिंग पर प्रतिबंध

8. ऊर्जा सुरक्षा लाभ

  • मीथेन लीकेज और फ्लेयरिंग को कम करके लगभग 100 अरब घन मीटर प्राकृतिक गैस प्राप्त की जा सकती है।

  • हर साल 150 अरब घन मीटर गैस फ्लेयर होती है, जो ज़रूरी नहीं है।

  • IEA-UK ऊर्जा सुरक्षा शिखर सम्मेलन (अप्रैल 2025) में मीथेन कटौती को ऊर्जा लचीलापन के लिए महत्वपूर्ण माना गया।

9. कुछ देशों और कंपनियों द्वारा सकारात्मक पहल

  • कनाडा ने अपनी उत्सर्जन रिपोर्ट को 35% अधिक संशोधित किया

  • कुछ कंपनियां जैसे TotalEnergies और ConocoPhillips, UNEP के उच्चतम मानकों पर खरे उतरे।

10. वैश्विक आह्वान

  • लगभग 100 देशों ने राष्ट्रीय मीथेन कार्य योजना शुरू की है।

  • यूरोपीय संघ (EU) का 2024 का विनियमन अब आयातित मीथेन पर भी लागू होगा।

  • बेहतर डेटा, नीति प्रवर्तन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक हैं।

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vikash

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