भारत ने एक बार फिर विश्व क्रिकेट में अपना दबदबा साबित किया। आईसीसी अंडर-19 पुरुष क्रिकेट विश्व कप 2026 के फाइनल में भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ लगभग परफेक्ट प्रदर्शन किया। रिकॉर्ड तोड़ बल्लेबाज़ी के बाद घातक और अनुशासित गेंदबाज़ी ने इंग्लैंड को पूरी तरह दबाव में डाल दिया, हालांकि इंग्लैंड की ओर से एक बल्लेबाज़ ने अकेले दम पर संघर्ष किया। यह मुकाबला युवा स्तर पर भारत की गहराई, निरंतरता और प्रभुत्व को दर्शाता है। इस शानदार जीत के साथ भारत ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अपना छठा अंडर-19 विश्व कप खिताब अपने नाम किया और टूर्नामेंट के इतिहास में अपनी विरासत को और मजबूत किया।
भारत ने अंडर-19 विश्वकप का खिताब जीत लिया है। फाइनल में टीम इंडिया ने इंग्लैंड को 100 रन से हराया। यह टीम इंडिया का रिकॉर्ड छठा खिताब है। इससे पहले भारत ने 2000, 2008, 2012, 2018 और 2022 में अंडर-19 विश्व कप खिताब पर कब्जा जमाया था। भारत ने इंग्लैंड के सामने 412 रन का लक्ष्य रखा था। जवाब में इंग्लिश टीम 40.2 ओवर में 311 रन रन पर सिमट गई। भारतीय टीम के लिए वैभव सूर्यवंशी फाइनल के सुपरस्टार रहे। उन्होंने 80 गेंद में 175 रन की ताबड़तोड़ पारी खेली।
भारत बनाम इंग्लैंड अंडर-19 विश्व कप फाइनल 2026 ने दुनिया भर का ध्यान खींचा, जब भारत ने अंडर-19 विश्व कप फाइनल के इतिहास का सबसे बड़ा टीम स्कोर बनाकर इंग्लैंड की चुनौती को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। भारत ने 50 ओवर में 9 विकेट पर 411 रन बनाए, जो किसी भी अंडर-19 विश्व कप फाइनल का सर्वाधिक स्कोर है। लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड ने बीच-बीच में संघर्ष जरूर किया, लेकिन नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे। यह मुकाबला अंडर-19 क्रिकेट में भारत के निरंतर प्रभुत्व और उभरती वैश्विक प्रतिभाओं की झलक का बड़ा मंच साबित हुआ।
भारत (पहली पारी): 50 ओवर में 411/9
वैभव सूर्यवंशी ने ऐतिहासिक 175 रनों की पारी खेली।
कप्तान आयुष म्हात्रे ने 53 रनों का योगदान दिया।
इंग्लैंड (पहली पारी): 311 रन (ऑल आउट)
इंग्लैंड के कालेब फाल्कनर का शतक बेकार गया।
भारत की ओर से आर. अंबरीश ने 3 विकेट चटकाए।
यह फाइनल वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक पारी के लिए हमेशा याद किया जाएगा। महज 14 वर्षीय वैभव ने 80 गेंदों पर 175 रन ठोकते हुए अंडर-19 विश्व कप फाइनल में सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर का रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने 32 गेंदों में अर्धशतक और सिर्फ 55 गेंदों में शतक पूरा किया तथा निडर स्ट्रोकप्ले से हर गेंदबाज़ पर दबाव बनाया। उनकी इस पारी ने भारत को 400 के पार पहुंचाया और इंग्लैंड का मनोबल तोड़ दिया।
फाइनल में भारत की बल्लेबाज़ी गहराई पूरी तरह नजर आई। वैभव सूर्यवंशी के आउट होने के बाद भी मध्य और निचले क्रम ने रन गति बनाए रखी। आयुष म्हात्रे, विहान मल्होत्रा, वेदांत त्रिवेदी के उपयोगी योगदान और अंत में कनिष्क चौहान की तेज़ पारी की बदौलत भारत 411/9 तक पहुंचा। यह न केवल टूर्नामेंट का बल्कि अंडर-19 विश्व कप फाइनल के इतिहास का भी सबसे बड़ा स्कोर बना, जिसने इंग्लैंड के सामने लगभग असंभव लक्ष्य रख दिया।
लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड की पारी जल्दी ही बिखरने लगी और नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे। इस संघर्ष के बीच कालेब फाल्कनर अकेले योद्धा बनकर सामने आए। उन्होंने साहसिक बल्लेबाज़ी करते हुए शानदार शतक जड़ा और आख़िरी तक लड़ते रहे। बेन डॉकिन्स और बेन मेयर्स ने शुरुआत में आक्रामक रुख जरूर दिखाया, लेकिन इंग्लैंड की टीम कोई ठोस साझेदारी नहीं बना सकी। फाल्कनर की पारी ने हार को कुछ देर टाला, लेकिन मैच का नतीजा बदलने में वह सफल नहीं हो सके।
अंडर-19 विश्व कप फाइनल में भारतीय गेंदबाज़ों ने अपनी योजनाओं को बेहतरीन तरीके से लागू किया। सटीक लाइन और लेंथ के साथ डाले गए शुरुआती ओवरों ने इंग्लैंड को कभी भी लय में नहीं आने दिया। आर. अंबरीश, आयुष म्हात्रे और दीपेश देवेंद्रन की अहम सफलताओं ने भारत को पूरे मैच में नियंत्रण में रखा। लगातार विकेट गिरने से इंग्लैंड के लिए रन रेट से ज़्यादा विकेट बचाना चुनौती बन गया। आख़िरकार अंतिम विकेट गिरते ही भारत ने एक और यादगार अंडर-19 विश्व कप खिताब पर मुहर लगा दी।
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