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संयुक्त राष्ट्र महासभा ने स्वस्थ पर्यावरण को मानव अधिकार माना

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने स्वस्थ पर्यावरण को मानव अधिकार माना |_50.1

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने हाल ही में एक प्रस्ताव पारित किया जो स्वस्थ पर्यावरण को मानव अधिकार के रूप में मान्यता देता है। भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है। इस प्रस्ताव के अनुसार स्वच्छ, स्वस्थ और सतत पर्यावरण का अधिकार मानव अधिकार बन गया है। 

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मुख्य बिंदु:

  • 193 सदस्यी महासभा में 161 मतों के साथ इस प्रस्ताव को पारित किया गया है। 
  • हालांकि, बेलारूस, कंबोडिया, चीन, इथियोपिया, ईरान, किर्गिस्तान, रूस और सीरिया ने खुद को इससे दूर रखा। जबकि भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करते हुए संकल्प की प्रक्रिया और सार पर अपनी चिंता व्यक्त की।
  • यह प्रस्ताव मानव अधिकार के रूप में एक स्वच्छ, स्वस्थ और टिकाऊ पर्यावरण के अधिकार को मान्यता देता है। 
  • इस बार की पुष्टि करता है कि मानव अधिकार को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण के सिद्धांतों के तहत बहुपक्षीय पर्यावरण समझौतों के पूर्ण कार्यान्वयन व कानून की आवश्यकता है।
  • यह स्वच्छ, स्वस्थ और सतत पर्यावरण के अधिकार को मानव अधिकार के रूप में मान्यता देता है।
  • यह सुनिश्चित करता है कि स्वच्छ, स्वस्थ और सतत पर्यावरण के मानव अधिकार को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण कानून के सिद्धांतों के अनुसार बहुपक्षीय पर्यावरण समझौतों के पूर्ण कार्यान्वयन की आवश्यकता है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के सलाहकार आशीष शर्मा ने कहा, भारत बेहतर पर्यावरण के लिए किसी भी प्रयास का समर्थन करता है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, इसके बावजूद हमारी कुछ चिंताए हैं, जिसके तहत हम संकल्प के ऑपरेटिव पैराग्राफ 1 से खुद को अलग करने के लिए बाध्य हैं। उन्होंने कहा कि संकल्प पैराग्राफ 1 में लिखा है कि यूएनजीए मानव अधिकार के रूप में स्वच्छ, स्वस्थ और टिकाऊ पर्यावरण के अधिकार को मान्यता देता है। 

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