भारत सरकार ने भारत के मर्चेंडाइज ट्रेड इंडेक्स (Merchandise Trade Indices) का आधार वर्ष 2012-13 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। यह घोषणा 20 फरवरी 2026 को की गई। इस संशोधन का उद्देश्य व्यापार आंकड़ों की प्रासंगिकता, विश्वसनीयता और विश्लेषणात्मक उपयोगिता को बेहतर बनाना है, ताकि नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत को अधिक सटीक जानकारी मिल सके। यह संशोधन वाणिज्यिक खुफिया और सांख्यिकी महानिदेशालय (DGCI&S) द्वारा किया गया, क्योंकि पिछले दशक में अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार पैटर्न में बड़े संरचनात्मक बदलाव हुए हैं।
आधार वर्ष क्यों बदला गया?
- भारत के मर्चेंडाइज ट्रेड इंडेक्स (Merchandise Trade Indices) का आधार वर्ष 2022-23 इसलिए संशोधित किया गया है ताकि यह भारत के वर्तमान बाह्य व्यापार ढांचे को सही रूप से प्रतिबिंबित कर सके।
- वर्ष 2012-13 के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव हुए हैं। इनमें वस्तुओं की संरचना (Commodity Composition) में परिवर्तन, निर्यात का विविधीकरण (Export Diversification) तथा नए व्यापारिक साझेदारों का उदय शामिल है।
- सरकार के अनुसार, आधार वर्ष को अद्यतन करने से सूचकांक समकालीन व्यापक आर्थिक संकेतकों (Macroeconomic Indicators) और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं (Global Best Practices) के साथ बेहतर सामंजस्य स्थापित करते हैं।
- यह संशोधन भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता के प्रोफेसर नचिकेता चट्टोपाध्याय की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों के आधार पर किया गया।
संशोधित ट्रेड इंडेक्स में क्या बदलाव हुए?
नई 2022-23 श्रृंखला में कई सुधार शामिल किए गए हैं—
- प्रमुख वस्तु (Principal Commodity – PC) स्तर पर अद्यतन कवरेज
- 2022-23 के व्यापार मूल्यों के आधार पर संशोधित वेटिंग संरचना
- उभरती और घटती व्यापार वस्तुओं का बेहतर प्रतिनिधित्व
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार वर्गीकरण के साथ सामंजस्य
- निर्यात और आयात में नवीनतम मूल्य हिस्सेदारी के अनुसार पुनर्गणित वेट
इससे सूचकांक भारत की वर्तमान व्यापार टोकरी को अधिक सटीक रूप से दर्शाते हैं।
नई श्रृंखला में विस्तृत कवरेज
संशोधित आधार वर्ष के तहत निम्नलिखित विस्तृत सूचकांक शामिल किए गए हैं—
- मासिक, त्रैमासिक और वार्षिक सूचकांक
- प्रमुख वस्तु (PC) वर्गीकरण आधारित सूचकांक
- मानक अंतर्राष्ट्रीय व्यापार वर्गीकरण (SITC) आधारित सूचकांक
- व्यापक आर्थिक श्रेणियाँ (BEC) आधारित सूचकांक
- शीर्ष 20 निर्यात और आयात साझेदार देशों के द्विपक्षीय एवं क्षेत्रवार सूचकांक
- व्यापार की शर्तें (Terms of Trade) — सकल, शुद्ध और आय शर्तें
यह व्यापक संरचना व्यापार नीति मूल्यांकन और आर्थिक पूर्वानुमान के लिए विश्लेषण क्षमता को मजबूत बनाती है।
Terms of Trade (व्यापार की शर्तें) क्या हैं?
संशोधन के बाद भारत में Terms of Trade के विश्लेषण को और सशक्त बनाया गया है—
- सकल व्यापार शर्तें (Gross Terms of Trade): निर्यात मात्रा सूचकांक ÷ आयात मात्रा सूचकांक
- शुद्ध व्यापार शर्तें (Net Terms of Trade): निर्यात मूल्य सूचकांक ÷ आयात मूल्य सूचकांक
- आय व्यापार शर्तें (Income Terms of Trade): शुद्ध व्यापार शर्तें × निर्यात मात्रा
इन संकेतकों से यह आकलन किया जाता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत की क्रय शक्ति बढ़ रही है या घट रही है।
अर्थशास्त्र में आधार वर्ष संशोधन का महत्व
- आधार वर्ष बदलना एक मानक सांख्यिकीय प्रक्रिया है, जिससे आर्थिक संकेतक सटीक और अद्यतन बने रहते हैं।
- समय के साथ व्यापार पैटर्न बदलते हैं, इसलिए पुराना आधार वर्ष वर्तमान वास्तविकताओं को सही ढंग से नहीं दर्शा पाता।
- अब 2022-23 को नया आधार वर्ष बनाने से नीति-निर्माताओं को निर्यात-आयात प्रदर्शन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर अधिक यथार्थवादी और समकालीन दृष्टिकोण मिलेगा।
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