भारत के नेतृत्व वाले कोडेक्स पैनल ने इन उत्पादों के लिए मानकों को अंतिम रूप दिया

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मसालों के व्यापार और गुणवत्ता मानकों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित करते हुए, कोडेक्स समिति ऑन स्पाइसेज़ एंड क्यूलिनरी हर्ब्स (CCSCH) के 8वें सत्र में तीन और मसालों — वनीला (Vanilla), बड़ी इलायची (Large Cardamom) और धनिया (Coriander) — के लिए अंतरराष्ट्रीय कोडेक्स मानक (Codex Standards) को अंतिम रूप दिया गया है। इस उपलब्धि के साथ, 2013 में समिति की स्थापना के बाद से अब तक कुल 19 मसालों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक विकसित किए जा चुके हैं।

भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका

  • यह सत्र भारत की वैश्विक मसाला नियमन (spice regulation) में निरंतर नेतृत्व को और सशक्त बनाता है।
  • भारत न केवल CCSCH के सचिवालय (Secretariat) की मेजबानी करता है, बल्कि Codex Alimentarius Commission (CAC) के प्रोटोकॉल के अनुरूप वैज्ञानिक और सर्वसम्मति-आधारित मानक विकसित करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
  • भारत का यह प्रयास मसाला उद्योग में पारदर्शिता, गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ वैश्विक व्यापार को भी सरल बनाता है।

कोडेक्स मानक क्या हैं?

Codex Standards ऐसे अंतरराष्ट्रीय खाद्य मानक हैं जिन्हें उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा और देशों के बीच निष्पक्ष व्यापार सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया जाता है।

  • ये मानक Codex Alimentarius Commission (CAC) द्वारा विकसित किए जाते हैं,
    जो संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की संयुक्त पहल है।

  • इसकी स्थापना 1963 में हुई थी और इसका मुख्यालय रोम (इटली) में स्थित है।

  • भले ही कोडेक्स मानक कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं, फिर भी ये WTO के Sanitary and Phytosanitary (SPS) Agreement के तहत अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के रूप में मान्यता प्राप्त हैं।

क्यों महत्वपूर्ण हैं?
ये मानक खाद्य सुरक्षा निरीक्षण, गुणवत्ता प्रमाणन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार विवादों में वैज्ञानिक साक्ष्य का आधार प्रदान करते हैं।

भारत की भूमिका CCSCH और CAC में

  • CCSCH (Codex Committee on Spices and Culinary Herbs) की स्थापना 2013 में भारत की पहल पर हुई थी।

  • यह समिति CAC के अंतर्गत कार्यरत है और इसका अध्यक्ष पद (Chairmanship) भी भारत के पास है।

  • स्पाइस बोर्ड ऑफ इंडिया (वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय), कोच्चि, इस समिति का सचिवालय है।

  • भारत के नेतृत्व में, पिछले एक दशक में 19 मसालों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक तय किए गए हैं — जिससे वैश्विक मसाला व्यापार में एकरूपता (harmonization) सुनिश्चित हुई है।

8वें CCSCH सत्र (2025) की मुख्य उपलब्धियाँ

इस सत्र में तीन प्रमुख मसालों के लिए कोडेक्स मानक निर्धारित किए गए —

वनीला (Vanilla)

  • परिचय: एक उच्च मूल्य वाला मसाला, जो ऑर्किड परिवार का सदस्य है और खाद्य पदार्थों तथा पेय पदार्थों में स्वाद बढ़ाने हेतु प्रयोग होता है।

  • मूल क्षेत्र: अटलांटिक तट (मेक्सिको से ब्राज़ील तक)।

  • मुख्य उत्पादक देश: मेडागास्कर, इंडोनेशिया और मेक्सिको।

  • भारत में उत्पादन: मुख्यतः केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में; भारत इसका शुद्ध आयातक (net importer) है।

खेती की आवश्यक स्थितियाँ:

  • ऊँचाई: 1000 मीटर तक

  • तापमान: 21–32°C

  • आर्द्रता: लगभग 80%

  • वर्षा: 2000–2500 मिमी, दो शुष्क महीनों सहित

  • मिट्टी: हल्की, झरझरी और आंशिक छायादार भूमि उपयुक्त है।

बड़ी इलायची (Large Cardamom)

  • मूल क्षेत्र: पूर्वोत्तर हिमालयी क्षेत्र (भारत, भूटान और नेपाल)।

  • उपयोग: भोजन में मसाले और औषधीय जड़ी-बूटी दोनों के रूप में प्रयोग।

  • महत्व: मानकीकरण से निर्यात की गुणवत्ता और स्थिरता में वृद्धि होगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय इलायची की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।

धनिया (Coriander)

  • विवरण: एक प्रमुख पाक मसाला, जिसका प्रयोग बीज और पाउडर दोनों रूपों में होता है।

  • मुख्य उत्पादक देश: भारत, मोरक्को, रूस, और पूर्वी यूरोप।

  • महत्व: मानकीकरण से निर्यात गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के अनुपालन में सुविधा होगी।

वैश्विक महत्व और प्रभाव

इन नए मानकों के माध्यम से:

  • गुणवत्ता की परिभाषा निर्यातक और आयातक देशों में समान हो जाएगी।

  • उपभोक्ता सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा, मिलावट और प्रदूषण के जोखिम घटेंगे।

  • तकनीकी अवरोधों (Technical Barriers) में कमी आने से वैश्विक मसाला व्यापार सुगम होगा।

  • वैज्ञानिक निरीक्षण और फाइटोसैनिटरी प्रमाणन अधिक सटीक और पारदर्शी बनेगा।

भारत के लिए लाभ

  • भारतीय मसाला निर्यातकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलेगी।

  • भारत का वैश्विक खाद्य मानक निर्धारण में प्रभाव और मजबूत होगा।

  • ब्रांड इंडिया स्पाइसेज़” की साख में वृद्धि होगी, जिससे विदेशी निवेश और बाजार पहुँच बढ़ेगी।

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vikash

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