भारत ने मालदीव को ₹4,850 करोड़ की ऋण सहायता प्रदान की

भारत ने प्रधानमंत्री की मालदीव यात्रा के दौरान नए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत मालदीव को 4,850 करोड़ की लोन सहायता प्रदान किया है। इस यात्रा के दौरान भारत और मालदीव के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और द्विपक्षीय निवेश संधि पर वार्ता की भी शुरुआत हुई, जो पड़ोसी पहले और महासागर (MAHASAGAR) दृष्टिकोण के तहत संबंधों को नई ऊर्जा देने की दिशा में एक निर्णायक पहल है। यह कदम राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ु के कार्यकाल में भारत-मालदीव संबंधों में आई खटास को कम करने का संकेत भी देता है, जिन्होंने अपने चुनाव अभियान में “इंडिया आउट” की नीति को प्रमुखता दी थी।

पृष्ठभूमि

भारत-मालदीव संबंध ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ रहे हैं, जो साझा इतिहास, संस्कृति, सुरक्षा और भौगोलिक समीपता पर आधारित हैं। हालांकि, नवंबर 2023 में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ु के सत्ता में आने के बाद इन संबंधों में तनाव आ गया, जब उन्होंने मालदीव से भारतीय सैन्य कर्मियों की वापसी की मांग की। भारत ने ये सैन्यकर्मी मानवीय सहायता और आपातकालीन बचाव अभियानों के लिए हेलीकॉप्टर और एक विमान के माध्यम से तैनात किए थे। इस तनाव को कम करने के प्रयास में भारत ने 2024 में सैन्य कर्मियों की जगह नागरिक तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती की। जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव यात्रा राष्ट्रपति मुइज़्ज़ु के कार्यकाल में किसी भी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की पहली यात्रा है और यह दोनों देशों के बीच संबंधों में एक नई शुरुआत का संकेत देती है।

₹4,850 करोड़ की ऋण सहायता का महत्व

यह सहायता भारत को मालदीव का सबसे विश्वसनीय विकास साझेदार सिद्ध करती है। यह ऋण मालदीव में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के वित्तपोषण में मदद करेगा, जिससे देश की आर्थिक पुनर्बहाली और सतत विकास को बल मिलेगा। एक पूर्ववर्ती डॉलर-आधारित ऋण सहायता समझौते में संशोधन भी किया गया है, जिससे मालदीव की वार्षिक ऋण चुकौती 40% घटाकर $51 मिलियन से $29 मिलियन कर दी गई है। यह सहायता भारत की आर्थिक कूटनीति का हिस्सा है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते चीनी प्रभाव के बीच रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक प्रयास है।

मुख्य उद्देश्य

  • आर्थिक सहयोग को मजबूत करना: अवसंरचना सहयोग और निवेश संधि ढांचे के माध्यम से।

  • मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ता शुरू करना: जिससे व्यापार और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा मिले।

  • राजनीतिक विश्वास की पुनर्बहाली: हालिया कटुता और भू-राजनीतिक परिवर्तनों के बीच संबंधों को फिर से मज़बूत बनाना।

  • समुद्री सुरक्षा का समर्थन: भारत की सागर (SAGAR) और महासागर (MAHASAGAR) नीति के तहत क्षेत्रीय शांति और समृद्धि सुनिश्चित करना।

  • ऋण बोझ को कम करना: मौजूदा देनदारियों के पुनर्गठन के ज़रिए मालदीव की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता को प्रोत्साहन देना।

समझौते और यात्रा की प्रमुख विशेषताएं

  • द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर चर्चा की शुरुआत: जिससे निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

  • मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ता प्रारंभ: जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक शुल्क कम हो सकते हैं और द्विपक्षीय व्यापार को प्रोत्साहन मिल सकता है।

  • सौहार्दपूर्ण कूटनीतिक संकेत: राष्ट्रपति मुइज़्ज़ु ने स्वयं हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया।

  • प्रधानमंत्री मोदी को मालदीव के स्वतंत्रता दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में सम्मानित किया गया: जो नवसृजित मित्रता का प्रतीक है।

  • गणमान्य स्तर की वार्ताएं और रिपब्लिक स्क्वायर पर गार्ड ऑफ ऑनर: जिससे द्विपक्षीय संबंधों का उच्च महत्व परिलक्षित होता है।

कूटनीतिक प्रभाव

  • यह कदम मालदीव में चीन के प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है, विशेषकर तब जब राष्ट्रपति मुइज़्ज़ु को चीन समर्थक समझा जाता रहा है।

  • भारत का यह रुख उसकी रणनीतिक धैर्य और सॉफ्ट पावर कूटनीति को दर्शाता है।

  • यह भारत की छवि को एक सुरक्षा प्रदाता और विकास भागीदार के रूप में स्थापित करता है।

  • यह पहल मालदीव को राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता देने में मदद करती है, जिससे पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा ढाँचे को मज़बूती मिलती है।

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vikash

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