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टैक्स समझौते में भारत ने फ्रांस में मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छोड़ा

भारत ने फ्रांस के साथ अपनी कर संधि से सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र (MFN) क्लॉज हटा दिया है। संशोधित भारत–फ्रांस कर संधि पर हाल ही में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए। इस बदलाव से डिविडेंड टैक्स, कैपिटल गेन टैक्सेशन और वैश्विक एंटी-टैक्स अवॉइडेंस (BEPS) नियमों में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। MFN क्लॉज हटने के बाद फ्रांस अब भारत की अन्य कर संधियों के आधार पर स्वतः कर लाभ नहीं मांग सकेगा। इस कदम का उद्देश्य है—कर विवाद कम करना और भारत व फ्रांस के बीच सीमा-पार कराधान (Cross-Border Taxation) में स्पष्टता लाना।

भारत–फ्रांस कर संधि क्या है?

भारत–फ्रांस कर संधि, जिसे आधिकारिक रूप से Double Taxation Avoidance Convention (DTAC) कहा जाता है, वर्ष 1992 में हस्ताक्षरित हुई थी।

इसका मुख्य उद्देश्य है—

एक ही आय पर दो देशों में दोहरी कराधान (Double Taxation) से बचाव करना।

MFN क्लॉज क्या करता था?

MFN (Most Favoured Nation) क्लॉज के तहत:

  • यदि भारत भविष्य में किसी अन्य देश को कम कर दर देता
  • तो फ्रांस स्वतः वही लाभ मांग सकता था
  • इसके लिए नई बातचीत (Negotiation) की आवश्यकता नहीं होती थी

अब MFN क्लॉज हटने के बाद, फ्रांस केवल वही कर लाभ ले सकेगा जो स्पष्ट रूप से भारत–फ्रांस संधि में लिखे गए हैं।

भारत ने MFN क्लॉज क्यों हटाया?

MFN क्लॉज हटाने के पीछे प्रमुख कारण:

  • लंबे समय से चल रहे कर विवादों को कम करना
  • भविष्य की संधियों के लाभों का स्वतः लागू होना रोकना
  • कर मामलों में कानूनी स्पष्टता लाना
  • भारत के कराधिकार (Taxation Rights) की सुरक्षा करना

अब संधि लाभ केवल स्पष्ट बातचीत और लिखित प्रावधानों के बाद ही लागू होंगे।

कैपिटल गेन नियमों में क्या बदलाव हुआ?

संशोधित संधि में कैपिटल गेन टैक्सेशन को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।

नया नियम:

शेयर बिक्री से होने वाला कैपिटल गेन उसी देश में टैक्स होगा, जहाँ संबंधित कंपनी स्थित है।

उदाहरण:

यदि कोई फ्रांसीसी निवेशक किसी भारतीय कंपनी के शेयर बेचता है, तो उस लाभ पर टैक्स लगाने का पूरा अधिकार भारत को होगा।

इससे पहले MFN ढांचे के कारण कई व्याख्यात्मक भ्रम उत्पन्न होते थे, जो अब समाप्त हो जाएंगे।

BEPS नियमों का समावेश

संशोधित भारत–फ्रांस कर संधि में अब वैश्विक BEPS (Base Erosion and Profit Shifting) प्रावधान जोड़े गए हैं।

प्रमुख प्रावधान:

  • मुनाफे के कृत्रिम स्थानांतरण (Profit Shifting) की रोकथाम
  • स्थायी प्रतिष्ठान (Permanent Establishment) के नियमों को सख्त करना
  • तकनीकी सेवाओं की फीस की स्पष्ट परिभाषा
  • कर जानकारी के बेहतर आदान-प्रदान की व्यवस्था

MFN क्लॉज हटाने और BEPS प्रावधानों के जुड़ने से पारदर्शिता बढ़ेगी और संधि के दुरुपयोग की संभावना घटेगी।

नई संधि कब लागू होगी?

संशोधित भारत–फ्रांस कर संधि तभी प्रभावी होगी जब:

  • भारत और फ्रांस दोनों अपने-अपने आंतरिक कानूनी अनुमोदन (Ratification) की प्रक्रिया पूरी करेंगे।

अनुमोदन के बाद ही MFN क्लॉज हटाने और नए कर नियम लागू होंगे।

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