भारत में 2017-18 से 17 करोड़ नौकरियां बढ़ीं: रोजगार और महिला भागीदारी में वृद्धि

पिछले छह वर्षों में भारत के श्रम बाज़ार में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला है। श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे द्वारा लोकसभा में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में नियोजित लोगों की संख्या 2017-18 में 47.5 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 64.33 करोड़ हो गई है। यह जानकारी भारतीय रिज़र्व बैंक के KLEMS डाटाबेस पर आधारित है, जो रोजगार में वृद्धि, बेरोजगारी में गिरावट और कार्यबल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।

बढ़ते रोजगार के अवसर

  • 2017-18 से 2023-24 के बीच भारत में लगभग 17 करोड़ नए रोजगार जुड़े, जो देश की मजबूत आर्थिक स्थिरता और उत्पादक रोजगार में विस्तार को दर्शाता है।
  • श्रम बल भागीदारी दर (Labour Force Participation Rate – LFPR) 2017-18 में 49.8% से बढ़कर 2023-24 में 60.1% हो गई।
  • कार्यकर्ता जनसंख्या अनुपात (Worker Population Ratio – WPR) इसी अवधि में 46.8% से बढ़कर 58.2% पर पहुंच गया।
  • बेरोजगारी दर में तेज गिरावट दर्ज की गई, जो 2017-18 में 6% थी और 2023-24 में घटकर 3.2% रह गई, जिससे पहले के बेरोजगारी संबंधी आशंकाएं कम हुई हैं।

महिला कार्यबल में बढ़ती भागीदारी

  • सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक है महिलाओं की कार्यबल में तेज़ी से बढ़ती भागीदारी।
  • 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के लिए कार्यकर्ता जनसंख्या अनुपात (WPR) 2019-20 में 28.7% से बढ़कर 2023-24 में 40.3% हो गया।
  • यह वृद्धि आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है, जिसे सरकारी नीतियों और बदलते सामाजिक दृष्टिकोण से बल मिला है।

युवा रोजगार प्रवृत्तियाँ

  • भारत में युवाओं की बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
  • यह दर 2017-18 में 17.8% थी, जो 2023-24 में घटकर 10.2% हो गई है—जो कि वैश्विक औसत 13.3% से भी कम है।
  • यह संकेत करता है कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में युवा श्रमिकों का रोजगार में समावेश बढ़ा है।

आँकड़ा संग्रहण और वैश्विक विश्वसनीयता

सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि भारत के बेरोजगारी आंकड़ों पर उठाए गए सवालों को खारिज करते हुए, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) की विश्वसनीयता को बरकरार रखा गया है।

  • PLFS “वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त” है और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के मानकों के अनुरूप है।
  • जनवरी 2025 से, PLFS ने श्रम बाजार की प्रवृत्तियों पर अधिक बार अपडेट देने के लिए मासिक अनुमान जारी करना शुरू किया है।
  • इसकी कार्यप्रणाली में बड़े पैमाने पर स्तरीकृत यादृच्छिक नमूना (stratified random sampling) शामिल है, जो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को सटीकता से कवर करता है।

सरकारी रुख

श्रम मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि श्रम संबंधित संकेतकों में हुआ सुधार यह सिद्ध करता है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत में रोजगार की स्थिति सकारात्मक दिशा में है। सरकार ने यह भी कहा कि देश की कार्य-योग्य जनसंख्या अब अधिक उत्पादक और लाभकारी रोजगार में संलग्न हो रही है, और बढ़ती बेरोजगारी के आरोपों को खारिज कर दिया।

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vikash

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