भारत का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक अक्टूबर 2025 में 0.4% की वृद्धि दर्ज करेगा

भारत के औद्योगिक क्षेत्र ने अक्टूबर में मात्र 0.4% की वृद्धि दर्ज की, जो पिछले 14 महीनों की सबसे कमजोर वृद्धि है। ये नए आँकड़े सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी किए गए हैं। यह धीमी वृद्धि मुख्य रूप से कमज़ोर विनिर्माण, खनन उत्पादन में गिरावट, और बिजली उत्पादन में कमी के कारण हुई।

पिछले साल की तुलना में काफी कम वृद्धि

  • अक्टूबर 2024 में औद्योगिक उत्पादन 3.7% बढ़ा था, जबकि इस वर्ष यह सिर्फ 0.4% रहा।
  • सितंबर 2025 में भी वृद्धि बेहतर थी—4% (पहले 3.2% अनुमानित)।
  • अंतिम बार इतनी कमजोर वृद्धि अगस्त 2024 में हुई थी, जब उत्पादन लगभग स्थिर रहा था।

औद्योगिक वृद्धि कमज़ोर क्यों है?

विशेषज्ञों के अनुसार औद्योगिक पुनरुद्धार अभी भी असमान और नाज़ुक है। इसके पीछे प्रमुख कारण हैं:

  • घरेलू मांग में कमी

  • वैश्विक परिस्थिति में अनिश्चितता

  • कुछ उद्योगों में विशिष्ट समस्याएँ

  • त्योहारों के कारण अक्टूबर में कार्य-दिवस कम होना

  • देर से मानसून वापसी, जिससे खनन और बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ

अर्थशास्त्री एन. आर. भानुमूर्ति ने बताया कि IIP उत्पादन की मात्रा पर आधारित होता है, और त्योहारों के चलते कम कार्य-दिवस होने से उत्पादन घटा।

अक्टूबर 2025 में सेक्टर-वार प्रदर्शन

1. विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing)

IIP में इसकी हिस्सेदारी लगभग 78% है।
अक्टूबर में विनिर्माण सिर्फ 1.8% बढ़ा, जबकि:

  • सितंबर में 5.6%

  • पिछले वर्ष अक्टूबर में 4.4% की वृद्धि हुई थी।

2. खनन क्षेत्र (Mining)

  • खनन उत्पादन अक्टूबर में 1.8% गिरा
  • सितंबर में भी यह 0.4% कम हुआ था, जबकि पिछले वर्ष अक्टूबर में 0.9% बढ़ा था।

3. बिजली क्षेत्र (Electricity)

  • बिजली उत्पादन अक्टूबर में 6.9% घटा
  • सितंबर में 3.1% बढ़ा था और पिछले वर्ष अक्टूबर में 2% वृद्धि हुई थी।

अर्थव्यवस्था के लिए मिश्रित संकेत

  • बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि औद्योगिक आंकड़े मिश्रित संकेत देते हैं।
  • जहाँ GST संग्रह अच्छे उपभोग की तरफ इशारा करते हैं, वहीं IIP आंकड़े धीमी उत्पादन वृद्धि दिखाते हैं।
  • उन्होंने यह भी कहा कि बारिश और कम कार्य-दिवसों ने खनन और बिजली क्षेत्र को प्रभावित किया।

उपयोग-आधारित श्रेणियों का प्रदर्शन

वृद्धि वाले सामान

  • पूंजीगत वस्तुएँ (Capital goods): +2.4%

  • मध्यवर्ती वस्तुएँ (Intermediate goods): +0.9%

  • इंफ्रास्ट्रक्चर/निर्माण वस्तुएँ: +7.9%

  • उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएँ (Consumer durables): 0.5% की मामूली गिरावट (पिछले महीने की तेज़ वृद्धि के बाद)

गिरावट वाले सामान

  • प्राथमिक वस्तुएँ (Primary goods): –0.6%

  • उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुएँ (Consumer non-durables): –4.4%

आगे क्या उम्मीद है?

अर्थशास्त्री मानते हैं कि अक्टूबर–दिसंबर (Q3) औद्योगिक क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा। उम्मीद है कि नए GST सिस्टम और पहले घोषित कम आयकर दरों का प्रभाव उपभोग बढ़ाएगा और औद्योगिक वृद्धि में सुधार ला सकता है।

यह औद्योगिक आँकड़ा ऐसे समय आया है जब भारत ने जुलाई–सितंबर तिमाही में 8.2% GDP वृद्धि दर्ज की है, जो संकेत देता है कि समग्र अर्थव्यवस्था अब भी मजबूत प्रदर्शन कर रही है।

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vikash

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