गुजरात ने ग्रामीण शासन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मुख्यमंत्री ग्रामोत्थान योजना की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य राज्य भर में ग्रामीण बुनियादी ढांचे का कायाकल्प करना है। इस योजना के तहत 2,666 नए पंचायत कार्यालयों की आधारशिला रखी गई। इसका लक्ष्य सरकारी सेवाओं को सीधे गांवों तक पहुंचाना और गांवों को अधिक आत्मनिर्भर बनाकर शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करना है।
मुख्यमंत्री ग्रामोत्थान योजना क्या है?
- मुख्यमंत्री ग्रामोत्थान योजना गुजरात सरकार की एक प्रमुख ग्रामीण विकास पहल है।
- इस योजना का उद्देश्य गांवों को उनकी ग्रामीण पहचान बनाए रखते हुए शहरों जैसी सुविधाएं प्रदान करना है।
- ग्राम पंचायतों को मजबूत बनाकर सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आवश्यक सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हों।
- यह कार्यक्रम ग्राम संस्थाओं को शासन और विकास के केंद्र के रूप में स्थापित करता है, ताकि ग्रामीणों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए शहरों की ओर न जाना पड़े।
पंचायत कार्यालय: शासन अब गांव के द्वार पर
- एमजीवाई के पहले चरण में 2,666 ग्राम पंचायत कार्यालय-सह-तलाटी आवास बनाए जाएंगे, जिन पर लगभग ₹663 करोड़ की लागत आएगी।
- इन आधुनिक भवनों से सरकारी योजनाओं, प्रमाणपत्रों और रिकॉर्ड तक ग्रामीणों की पहुंच आसान होगी।
- पहले चरण में 114 तालुका मुख्यालयों के अंतर्गत आने वाले गांव शामिल हैं, और भविष्य में 10,000 से अधिक आबादी वाली सभी पंचायतों तक योजना का विस्तार किया जाएगा।
- इससे जमीनी स्तर पर लोकतंत्र और प्रशासनिक दक्षता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
गांवों में शहरी सुविधाएं: प्रमुख फोकस क्षेत्र
- इस योजना के तहत गांवों में वे सुविधाएं विकसित की जाएंगी जो आमतौर पर शहरों में उपलब्ध होती हैं।
- इनमें बेहतर सड़क संपर्क, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता व्यवस्था, सोलर स्ट्रीट लाइट, ई-ग्राम केंद्र और सामुदायिक भवन शामिल हैं।
- बुनियादी ढांचे के इस उन्नयन से ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
- सरकार का लक्ष्य है कि गांव अधिक रहने योग्य, आर्थिक रूप से सक्रिय और सामाजिक रूप से सशक्त बनें, जिससे शहरों की ओर पलायन कम हो और शहरी भीड़ घटे।
ग्रामीण-शहरी असंतुलन को कम करने की पहल
- मुख्यमंत्री के अनुसार, बढ़ते शहरीकरण के दबाव को संतुलित करने के लिए विशेष योजना की आवश्यकता है।
- मुख्यमंत्री ग्रामोत्थान योजना इसी उद्देश्य से संतुलित और समावेशी विकास को बढ़ावा देती है।
- यह योजना “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है।
- गांवों को सशक्त बनाकर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को विकास केंद्रों के रूप में विकसित करना चाहती है।
गांधीवादी विचार और ग्राम स्वराज
- इस योजना की शुरुआत शहीद दिवस के अवसर पर की गई, जो महात्मा गांधी की 1948 में हुई शहादत की स्मृति में मनाया जाता है।
- मुख्यमंत्री ने गांधीजी के ‘ग्राम स्वराज’ के विचार को याद किया, जिसमें आत्मनिर्भर और सशक्त गांवों पर जोर दिया गया है।
- ग्रामोत्थान योजना इसी दर्शन को आगे बढ़ाती है, जहां गांवों को आश्रित इकाइयों के बजाय विकास के इंजन के रूप में देखा जाता है।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]