अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में समुद्री जीवन की रक्षा के लिए दुनिया का पहला कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता ‘हाई सीज ट्रीटी’ 17 जनवरी 2026 से प्रभाव में आ गया। लगभग दो दशकों की लंबी बातचीत के बाद लागू हुई यह संधि महासागर संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। यह संधि उन समुद्री क्षेत्रों पर लागू होगी, जो किसी भी देश के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। यह समझौता राष्ट्रीय सीमाओं से परे स्थित अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्रों (हाई सीज) की सुरक्षा के लिए वैश्विक नियम तय करता है। ये जलक्षेत्र पृथ्वी के लगभग आधे हिस्से को कवर करते हैं। यह संधि अतिशिकार, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और गहरे समुद्र के पारिस्थितिक तंत्रों पर बढ़ते खतरों से निपटने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।
क्यों खबरों में?
60 से अधिक देशों द्वारा अनुमोदन (Ratification) के बाद हाई सीज ट्रीटी आधिकारिक रूप से लागू हो गई है। यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्रों में समुद्री जैव-विविधता के संरक्षण के लिए वैश्विक नियम स्थापित करती है।
हाई सीज ट्रीटी क्या है?
- यह संयुक्त राष्ट्र (UN) के अंतर्गत अपनाया गया एक वैश्विक समझौता है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय अधिकार-क्षेत्र से बाहर के क्षेत्रों में समुद्री जैव-विविधता की रक्षा करना है।
- ये क्षेत्र किसी एक देश के नियंत्रण में नहीं होते और विश्व के महासागरों के लगभग दो-तिहाई हिस्से में फैले हैं।
- अब तक इन क्षेत्रों के संरक्षण के लिए कोई बाध्यकारी कानूनी ढांचा नहीं था।
- यह संधि संरक्षण, सतत उपयोग और समुद्री संसाधनों के न्यायसंगत साझा के नियम बनाकर इस कमी को पूरा करती है।
हाई सीज क्यों महत्वपूर्ण हैं?
- हाई सीज पृथ्वी की जलवायु को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
- महासागर बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं और ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं।
- हालांकि, अतिशिकार, प्लास्टिक प्रदूषण, विनाशकारी मछली पकड़ने की पद्धतियाँ, जहाजों से उत्सर्जन और संभावित डीप-सी माइनिंग जैसे गंभीर खतरे मौजूद हैं।
- जलवायु परिवर्तन ने इन जोखिमों को और बढ़ा दिया है।
- इसलिए हाई सीज का संरक्षण समुद्री जीवन ही नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व और जलवायु स्थिरता के लिए भी आवश्यक है।
ट्रीटी के प्रमुख प्रावधान
- अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्रों में समुद्री संरक्षित क्षेत्र (MPAs) स्थापित करने के लिए पहला कानूनी ढांचा। (वर्तमान में केवल लगभग 1% हाई सीज़ संरक्षित हैं।)
- महासागर विज्ञान, तकनीक और डेटा साझा करने में देशों के बीच सहयोग।
- समुद्री पारिस्थितिकी को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियों के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) अनिवार्य।
- समुद्री आनुवंशिक संसाधनों (जैसे औषधियों में उपयोगी जीव) पर शोध के लाभों का खुला और न्यायसंगत साझा।
देशों के लिए तात्कालिक दायित्व
- अनुमोदन करने वाले देशों को वैश्विक महासागर शासन को सुदृढ़ करने के लिए तुरंत सहयोग शुरू करना होगा।
- विकासशील देशों को वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता निर्माण हेतु सहायता मिलेगी।
- अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) और अंतरराष्ट्रीय सीबेड प्राधिकरण (ISA) जैसे मंचों पर संरक्षण लक्ष्यों को बढ़ावा देना अनिवार्य।
- इससे समुद्री संरक्षण सभी समुद्री निर्णय प्रक्रियाओं में मुख्यधारा बनेगा।
समुद्री संरक्षित क्षेत्र और प्रवर्तन की चुनौतियाँ
- सारगासो सागर और एम्परर सीमाउंट्स जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में MPAs प्रस्तावित किए जा सकते हैं।
- प्रवर्तन चुनौतीपूर्ण रहेगा; निगरानी के लिए उपग्रह ट्रैकिंग, संयुक्त नौसैनिक गश्त और UN एजेंसियों के साथ सहयोग शामिल हैं।
- संरक्षण समूहों के अनुसार, राजनीतिक इच्छाशक्ति निर्णायक होगी—कड़े नियमन के बिना संरक्षित क्षेत्र प्रभावी नहीं होंगे।
वैश्विक लक्ष्य और समय का दबाव
- यह ट्रीटी 2030 तक विश्व के 30% महासागरों के संरक्षण के वैश्विक लक्ष्य का समर्थन करती है।
- चूँकि हाई सीज महासागरों का बड़ा हिस्सा हैं, इसलिए लक्ष्य प्राप्ति के लिए इनका संरक्षण अनिवार्य है।
- संरक्षणवादियों ने चेताया है कि कार्यान्वयन में देरी से संधि का प्रभाव कम हो सकता है, भले ही वैश्विक समर्थन मजबूत हो।
हाई सीज ट्रीटी (BBNJ संधि) – संक्षेप में
- आधिकारिक नाम: राष्ट्रीय अधिकार-क्षेत्र से बाहर क्षेत्रों की समुद्री जैव-विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग पर समझौता
- प्रचलित नाम: “महासागरों के लिए पेरिस समझौता”
- स्वीकृत: 2023
- कानूनी दर्जा: हाई सीज में जैव-विविधता संरक्षण के लिए पहला कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता
- ढांचा: संयुक्त राष्ट्र समुद्री क़ानून संधि (UNCLOS) के अंतर्गत अपनाया गया
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