वित्त वर्ष 2025–26 के पहले आठ महीनों में भारतीय औषधि (फार्मास्यूटिकल) निर्यात ने मजबूत प्रदर्शन किया है और इसमें 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए यह 20.48 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया। इस वृद्धि में ब्राज़ील और नाइजीरिया जैसे देशों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। नाइजीरिया ने विशेष रूप से 179 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि के साथ उल्लेखनीय योगदान दिया, जबकि ब्राज़ील में भी भारतीय दवाओं के आयात में तेज़ बढ़ोतरी देखी गई। यह रुझान वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग और भारतीय जेनेरिक दवाओं की बढ़ती पहुँच को दर्शाता है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच ब्राज़ील और नाइजीरिया भारतीय औषधि (फार्मास्यूटिकल) उत्पादों के प्रमुख निर्यात गंतव्य के रूप में उभर रहे हैं। अप्रैल–नवंबर 2025–26 की अवधि में भारत के फार्मा निर्यात में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है।
भारत विश्व के सबसे बड़े जेनेरिक दवा आपूर्तिकर्ताओं में से एक है और उसके औषधि उत्पाद 200 से अधिक देशों में निर्यात किए जाते हैं। यह उद्योग वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि यह किफायती दवाएँ और टीके उपलब्ध कराता है तथा उत्तरी अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख बाज़ारों के कड़े नियामक मानकों को पूरा करता है। ऐतिहासिक रूप से अमेरिका, ब्रिटेन, ब्राज़ील, फ्रांस और दक्षिण अफ्रीका भारत के प्रमुख निर्यात गंतव्यों में शामिल रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय दवाओं की व्यापक मांग को दर्शाता है।
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