केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 7 फरवरी 2026 को बताया कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने क्यासानूर फॉरेस्ट डिज़ीज़ (केएफडी) यानी ‘बंदर बुखार’ के लिए सुधारित और प्रभावी वैक्सीन के मानव क्लिनिकल ट्रायल की शुरुआत कर दी है। यह बीमारी पश्चिमी घाट क्षेत्र के कई राज्यों को प्रभावित करती है। स्वदेशी अनुसंधान के माध्यम से विकसित यह नया वैक्सीन रोग की रोकथाम और क्षेत्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमता को दर्शाता है।
क्यासानूर फॉरेस्ट डिज़ीज़ (KFD) वैक्सीन में प्रगति
- भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने क्यासानूर फॉरेस्ट डिज़ीज़ के उन्नत वैक्सीन के लिए फेज-I मानव क्लीनिकल ट्रायल शुरू कर दिए हैं।
- यह वैक्सीन विकास स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के तहत किया जा रहा है।
- यह कदम दक्षिण भारत के वन क्षेत्रों में फैलने वाली टिक-जनित वायरल बीमारी KFD को नियंत्रित करने की दिशा में भारत के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
क्यासानूर फॉरेस्ट डिज़ीज़ क्या है
- क्यासानूर फॉरेस्ट डिज़ीज़ एक टिक-जनित वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से पश्चिमी घाट क्षेत्र में पाया जाता है।
- इससे कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, गोवा और महाराष्ट्र जैसे राज्य प्रभावित होते हैं।
- यह बीमारी तेज बुखार, रक्तस्राव जैसे लक्षण और गंभीर मामलों में तंत्रिका संबंधी जटिलताओं का कारण बनती है।
- चूंकि KFD क्षेत्र-विशेष तक सीमित है और वन कर्मियों व ग्रामीण आबादी को अधिक प्रभावित करती है, इसलिए इसके लिए प्रभावी वैक्सीन का विकास अत्यंत आवश्यक है।
ICMR द्वारा स्वदेशी वैक्सीन विकास
- कर्नाटक सरकार के अनुरोध पर ICMR ने क्यासानूर फॉरेस्ट डिज़ीज़ के लिए नई वैक्सीन विकसित करने की जिम्मेदारी संभाली।
- यह परियोजना इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के सहयोग से संचालित की जा रही है।
- यह वैक्सीन पूरी तरह स्वदेशी, दो-डोज़, एडजुवेंटेड इनएक्टिवेटेड वैक्सीन है, जिसे 28 दिनों के अंतराल पर दिया जाता है, जिससे इसकी किफायती कीमत और स्थानीय उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
पशु परीक्षण और सुरक्षा जांच पूरी
- उन्नत KFD वैक्सीन ने पशुओं पर किए गए चैलेंज स्टडी और टॉक्सिसिटी टेस्ट सफलतापूर्वक पास कर लिए हैं।
- इन अध्ययनों से वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की पुष्टि हुई।
- इसके बाद नियामक मानकों के अनुरूप GLP-ग्रेड वैक्सीन सामग्री का निर्माण किया गया।
- इन प्री-क्लीनिकल चरणों की सफलता ने मानव परीक्षण का मार्ग प्रशस्त किया।
फेज-I क्लीनिकल ट्रायल और नियामक मंजूरी
- प्री-क्लीनिकल सफलता के बाद वैक्सीन ने फेज-I मानव क्लीनिकल ट्रायल में प्रवेश किया।
- यह चरण केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की मंजूरी के बाद शुरू हुआ।
- फेज-I ट्रायल में मुख्य रूप से स्वस्थ स्वयंसेवकों में वैक्सीन की सुरक्षा और इम्यून रिस्पॉन्स का आकलन किया जाता है।
- सफल होने पर वैक्सीन आगे के क्लीनिकल चरणों में जाएगी।
आगे की राह
- यदि फेज-I ट्रायल के परिणाम सकारात्मक रहते हैं, तो वैक्सीन के लिए आगे के क्लीनिकल परीक्षण किए जाएंगे।
- सुरक्षा और प्रतिरक्षात्मक क्षमता स्थापित होने के बाद अंतिम मंजूरी के लिए CDSCO से अनुमति ली जाएगी।
- भारत सरकार ने ग्रामीण और वन-आश्रित समुदायों को प्रभावित करने वाली क्षेत्र-विशेष स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में राज्यों को पूरा सहयोग देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
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