भारत ने देश के इस हिस्से से देशव्यापी दलहन क्रांति की शुरुआत की

मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे से भारत की कृषि नीति में एक बड़े बदलाव की शुरुआत हुई। 7 फरवरी 2026 को सीहोर जिले के आमलाहा से देशव्यापी दाल क्रांति का शुभारंभ किया गया। इसी अवसर पर दालों में आत्मनिर्भरता मिशन को औपचारिक रूप से लागू किया गया, जिसका उद्देश्य भारत की आयातित दालों पर निर्भरता को समाप्त करना है। इस पहल ने जमीनी स्तर से स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब दालों का आयातक नहीं, बल्कि वैश्विक निर्यातक बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा, जहाँ किसान नीति-निर्माण के केंद्र में होंगे।

आमलाहा से देशव्यापी दाल क्रांति का शुभारंभ

देशव्यापी दाल क्रांति का शुभारंभ मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के आमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (FLRP) से शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में किया गया। राष्ट्रीय दलहन परामर्श में केंद्रीय व राज्य कृषि मंत्री, वैज्ञानिक, एफपीओ, बीज कंपनियाँ, मिलर्स और प्रगतिशील किसान शामिल हुए। यह संवाद पहले की नीति बैठकों से अलग, फाइल-आधारित नहीं बल्कि खेत-आधारित रहा। दालों में आत्मनिर्भरता मिशन का रोडमैप सीधे किसानों की भागीदारी से तैयार किया गया, जो किसान-केंद्रित कृषि शासन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

दालों में आत्मनिर्भरता मिशन: स्पष्ट नीति दिशा

आत्मनिर्भरता मिशन का उद्देश्य भारत को दाल उत्पादन में पूर्णतः आत्मनिर्भर बनाना है। श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दालों का आयात “शर्म की बात” है और भारत को निर्यातक बनना चाहिए। मिशन का फोकस दालों के रकबे में वृद्धि, उत्पादकता सुधार और किसानों की लाभप्रदता सुनिश्चित करने पर है। केंद्र ने स्पष्ट किया कि दालों में आत्मनिर्भरता कोई नारा नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा, पोषण और किसान आय वृद्धि से जुड़ी दीर्घकालिक राष्ट्रीय प्राथमिकता है।

बीज से बाजार तक: मूल्य शृंखला पर जोर

इस मिशन का एक प्रमुख स्तंभ बीज से बाजार तक की मूल्य शृंखला है। सरकार गुणवत्तापूर्ण बीज, वैज्ञानिक खेती, प्रसंस्करण और सुनिश्चित बाजारों पर ध्यान देगी। अब बीजों की केंद्रीय स्तर पर दिल्ली से रिलीज नहीं होगी। इसके बजाय बीज गांव और राज्य स्तरीय बीज प्रणालियों को मजबूत किया जाएगा, ताकि किसानों को क्षेत्र-विशिष्ट, उच्च उपज वाली किस्में मिलें। क्लस्टर से जुड़ने वाले किसानों को बीज किट और ₹10,000 प्रति हेक्टेयर की वित्तीय सहायता मॉडल दलहन खेती के लिए दी जाएगी।

क्लस्टर मॉडल और 1,000 दाल मिल योजना

दाल क्रांति के तहत क्लस्टर-आधारित मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा, जहाँ दालों का प्रसंस्करण उत्पादन स्थल पर ही होगा। केंद्र सरकार देशभर में 1,000 दाल मिलों की स्थापना को समर्थन देगी, प्रत्येक इकाई पर ₹25 लाख तक की सब्सिडी मिलेगी। अकेले मध्य प्रदेश को 55 दाल मिलें मिलेंगी। इससे ग्रामीण रोजगार सृजन, कटाई-पश्चात नुकसान में कमी और मूल्य संवर्धन के जरिए किसानों की आय बढ़ेगी।

अंतरराष्ट्रीय समझौतों में किसानों के हित सुरक्षित

अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर चिंताओं को संबोधित करते हुए श्री चौहान ने भरोसा दिलाया कि भारतीय किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा। गेहूं, धान, मक्का, सोयाबीन, दालें, डेयरी, पोल्ट्री, एथेनॉल और सब्ज़ियाँ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने कहा कि ये समझौते बासमती चावल, मसाले, वस्त्र आदि के निर्यात को बढ़ाएंगे, जबकि एमएसपी, घरेलू उत्पादन और किसान बाजार प्राथमिकता बने रहेंगे।

भारत के लिए दालों का महत्व

भारत की बड़ी शाकाहारी आबादी के लिए दालें प्रोटीन का प्रमुख स्रोत हैं। बड़े उत्पादक होने के बावजूद मांग-आपूर्ति अंतर के कारण भारत को दालों का आयात करना पड़ता है। दाल उत्पादन बढ़ने से पोषण सुधार, मृदा स्वास्थ्य (नाइट्रोजन स्थिरीकरण) और किसान आय में वृद्धि होती है। एक मजबूत दलहन क्षेत्र विदेशी मुद्रा की बचत करता है और खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करता है।

दालों में आत्मनिर्भरता मिशन (Mission for Aatmanirbharta in Pulses)

पहलू विवरण
मिशन का नाम दालों में आत्मनिर्भरता मिशन
उद्देश्य दाल उत्पादन में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करना
घोषणा किसने की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (बजट भाषण में)
शुभारंभ तिथि 11 अक्टूबर, 2025 (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा)
बजट संदर्भ केंद्रीय बजट 2025–26
मिशन अवधि 6 वर्ष (2025–26 से 2030–31)
कुल परिव्यय ₹11,440 करोड़

मिशन के मुख्य फोकस क्षेत्र

फोकस क्षेत्र विवरण
जलवायु-सहिष्णु किस्में उच्च प्रोटीन एवं जलवायु-सहिष्णु दाल किस्मों का विकास और प्रसार
उत्पादकता वृद्धि उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से उपज बढ़ाना
क्षेत्र विस्तार अधिक भूमि को दालों की खेती के अंतर्गत लाना
कटाई-उपरांत प्रबंधन भंडारण, प्रसंस्करण और आपूर्ति श्रृंखला अवसंरचना को सुदृढ़ करना
किसान पारिश्रमिक दाल किसानों को उचित और लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

दुनिया का सबसे जहरीला बिच्छू कौन सा है?, जानें कहाँ पाए जाते हैं सबसे ज्यादा बिच्छू

धरती पर मौजूद सबसे डरावने जीवों में बिच्छू (Scorpion) का नाम जरूर लिया जाता है।…

1 week ago

भारत में कहाँ है एशियाई शेरों का असली घर? दुनिया की इकलौती जगह जहाँ जंगल में आज़ादी से घूमते हैं Asiatic Lions

शेरों का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में अफ्रीका के विशाल जंगलों की तस्वीर…

2 weeks ago

भारत का कौन-सा राज्य कहलाता है “Spice Garden of India”? जिसके मसालें दुनिया-भर में है मशहूर

भारत अपने मसालों के लिए सदियों से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध रहा है। भारतीय मसालों…

2 weeks ago

भारत का सबसे अमीर गांव कौन-सा है? यहां हर घर में करोड़ों की संपत्ति, बैंक में जमा हैं हजारों करोड़

भारत गांवों का देश कहा जाता है। यहां लाखों गांव हैं, जिनमें से कई आज…

2 weeks ago

क्या आप जानते हैं भारत का Tea Capital कौन-सा राज्य है? यहां उगती है सबसे ज्यादा चाय

रेलवे स्टेशन हो, ऑफिस हो या गांव की चौपाल — चाय हर जगह लोगों की…

2 weeks ago

भारत का कौन-सा शहर कहलाता है “Mini India”? जानिए क्यों मिली यह खास पहचान

भारत अपनी विविधता, संस्कृति, भाषाओं और परंपराओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है।…

2 weeks ago