सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक (Starlink) भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात में एंट्री करने वाली है। गुजरात सरकार ने स्पेसएक्स(SpaceX) की सब्सिडियरी के साथ लेटर ऑफ़ इंटेंट (LoI) साइन किया है। लेटर ऑफ़ इंटेंट एक्सचेंज सेरेमनी गांधीनगर में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी की मौजूदगी में हुई। जिसका उद्देश्य, राज्य के दूरदराज, सीमावर्ती और ऐसे इलाकों में हाई-स्पीड सैटेलाइट-आधारित इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी। डिजिटल इंडिया और विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों के अनुरूप यह पहल ई-गवर्नेंस, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आपदा प्रबंधन को मज़बूत करने के लिए विश्वसनीय डिजिटल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने स्पेसएक्स की सहायक कंपनी स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशंस के साथ सहयोग ढांचे में प्रवेश किया है। इस आशय पत्र (LoI) का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों में सैटेलाइट आधारित ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है, जहाँ पारंपरिक दूरसंचार नेटवर्क कमजोर हैं या उपलब्ध नहीं हैं। यह साझेदारी दिसंबर 2025 में राज्य नेतृत्व और स्टारलिंक के वैश्विक नेतृत्व के बीच हुई प्रारंभिक चर्चाओं का परिणाम है।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया विज़न के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य तकनीक आधारित शासन और समावेशी विकास है। सैटेलाइट इंटरनेट के माध्यम से गुजरात भौगोलिक बाधाओं को पार कर सीमावर्ती और आंतरिक आदिवासी क्षेत्रों तक ई-गवर्नेंस, सार्वजनिक सेवाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की पहुँच सुनिश्चित करना चाहता है।
पायलट चरण में नर्मदा और दाहोद जैसे आदिवासी एवं आकांक्षी जिलों में स्टारलिंक कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी, जहाँ लंबे समय से कनेक्टिविटी की समस्याएँ बनी हुई हैं। इससे कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और ई-गवर्नेंस सुविधाएँ अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगी तथा नागरिकों को सरकारी योजनाओं, प्रमाणपत्रों और कल्याणकारी सेवाओं तक तेज़ पहुँच मिलेगी।
इस पहल का एक प्रमुख हिस्सा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), सरकारी स्कूलों और टेली-मेडिसिन केंद्रों के लिए स्मार्ट कनेक्टिविटी है। हाई-स्पीड इंटरनेट से दूरस्थ परामर्श, डिजिटल कक्षाएँ, रियल-टाइम डेटा शेयरिंग और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएँ संभव होंगी, खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में।
LoI में जिला आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्षों, पुलिस चौकियों, बंदरगाहों और वन्यजीव अभयारण्यों के लिए कनेक्टिविटी भी शामिल है। विश्वसनीय सैटेलाइट संचार से प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियाँ, आपातकालीन समन्वय, तटीय सुरक्षा, वन्यजीव निगरानी और राजमार्ग सुरक्षा प्रणालियाँ मज़बूत होंगी। इससे यह पहल विकास के साथ-साथ लचीलापन और आंतरिक सुरक्षा के लिए भी अहम बनती है।
सामाजिक क्षेत्रों के अलावा, समझौते में GIDC औद्योगिक पार्कों, बंदरगाहों, समुद्री संचालन और तटीय पुलिस इकाइयों में डिजिटल कनेक्टिविटी सुधारने का प्रावधान है। इससे औद्योगिक दक्षता, लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा और निगरानी बेहतर होगी और गुजरात एक अग्रणी विनिर्माण व निवेश गंतव्य के रूप में अपनी स्थिति और सुदृढ़ करेगा।
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