गिनी में सैन्य तख्तापलट करवाने वाले नेता ममाडी डौमबौया ने जीता राष्ट्रपति चुनाव

पश्चिम अफ्रीका के देश गिनी में राजनीतिक स्थिति ने एक निर्णायक मोड़ लिया है। 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से देश का नेतृत्व कर रहे सैन्य नेता ममाडी डौमबौया राष्ट्रपति चुनाव जीतकर सत्ता में आ गए हैं। प्रमुख विपक्षी दलों द्वारा चुनाव बहिष्कार किए जाने के बीच हुए इस चुनाव के परिणामों ने लोकतांत्रिक संक्रमण और नागरिक शासन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

खबर में क्यों?

गिनी के जुंटा प्रमुख ममाडी डौमबौया ने दिसंबर 2025 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में भारी बहुमत से जीत हासिल की। चुनाव लड़ने का उनका फैसला नागरिक शासन बहाल करने के पहले किए गए वादे से पीछे हटने के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी दलों ने चुनाव को अनुचित बताते हुए इसका बहिष्कार किया।

गिनी में राजनीतिक संकट की पृष्ठभूमि

  • सितंबर 2021 में ममाडी डौमबौया ने सैन्य तख्तापलट कर गिनी के पहले लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति अल्फा कोंडे को सत्ता से हटा दिया।
  • तख्तापलट के बाद संविधान निलंबित कर दिया गया और नागरिक शासन की ओर संक्रमण का आश्वासन दिया गया।
  • इस अवधि में राजनीतिक स्वतंत्रताओं पर अंकुश लगाया गया, विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाया गया और कई विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार या निर्वासन में भेज दिया गया।

चुनाव प्रक्रिया और परिणाम

  • राष्ट्रपति चुनाव में कुल आठ उम्मीदवार मैदान में थे।
  • नए संवैधानिक प्रावधानों के तहत कई प्रमुख विपक्षी नेताओं को चुनाव लड़ने से रोका गया।
  • गिनी के चुनाव आयोग के अनुसार, ममादी डूम्बूया को 86.72% वोट मिले, जिससे उन्हें दूसरे दौर की आवश्यकता के बिना ही जीत मिल गई।
  • आधिकारिक तौर पर मतदान प्रतिशत 80.95% बताया गया, हालांकि विपक्षी समूहों ने इस आंकड़े पर सवाल उठाए।

नए संविधान की भूमिका

  • सितंबर 2025 में गिनी में जनमत संग्रह के माध्यम से नया संविधान अपनाया गया।
  • इस संविधान ने सत्तारूढ़ सैन्य जुंटा के सदस्यों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी, जिससे डौमबौया की उम्मीदवारी का रास्ता साफ हुआ।
  • राष्ट्रपति का कार्यकाल पांच वर्ष से बढ़ाकर सात वर्ष कर दिया गया, जिसे एक बार नवीनीकृत किया जा सकता है।
  • यह संवैधानिक बदलाव विपक्ष के लिए सबसे बड़ा विवाद का विषय बन गया।

पश्चिम अफ्रीका में सैन्य तख्तापलट

  • हाल के वर्षों में पश्चिम अफ्रीका में माली, बुर्किना फासो और नाइजर जैसे देशों में सैन्य तख्तापलट देखने को मिले हैं।
  • ऐसे संक्रमण अक्सर लोकतंत्र बहाल करने के वादों के साथ शुरू होते हैं, लेकिन जब सैन्य नेता चुनावों के जरिए सत्ता बनाए रखते हैं तो आलोचना तेज हो जाती है।
  • गिनी का मामला क्षेत्र में स्थिरता और लोकतांत्रिक शासन के बीच संतुलन की व्यापक चुनौती को दर्शाता है।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

G7 Summit 2026: फ्रांस में दुनिया के 7 सबसे ताकतवर देशों की बैठक, जानिए 13 बड़े फैसले और भारत के लिए क्यों है खास

दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कई बड़े फैसलों का मंच माने जाने…

3 weeks ago

दुनिया का सबसे जहरीला बिच्छू कौन सा है?, जानें कहाँ पाए जाते हैं सबसे ज्यादा बिच्छू

धरती पर मौजूद सबसे डरावने जीवों में बिच्छू (Scorpion) का नाम जरूर लिया जाता है।…

2 months ago

भारत में कहाँ है एशियाई शेरों का असली घर? दुनिया की इकलौती जगह जहाँ जंगल में आज़ादी से घूमते हैं Asiatic Lions

शेरों का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में अफ्रीका के विशाल जंगलों की तस्वीर…

2 months ago

भारत का कौन-सा राज्य कहलाता है “Spice Garden of India”? जिसके मसालें दुनिया-भर में है मशहूर

भारत अपने मसालों के लिए सदियों से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध रहा है। भारतीय मसालों…

2 months ago

भारत का सबसे अमीर गांव कौन-सा है? यहां हर घर में करोड़ों की संपत्ति, बैंक में जमा हैं हजारों करोड़

भारत गांवों का देश कहा जाता है। यहां लाखों गांव हैं, जिनमें से कई आज…

2 months ago

क्या आप जानते हैं भारत का Tea Capital कौन-सा राज्य है? यहां उगती है सबसे ज्यादा चाय

रेलवे स्टेशन हो, ऑफिस हो या गांव की चौपाल — चाय हर जगह लोगों की…

2 months ago