अप्रैल से वित्त वर्ष में खाद्य और उर्वरक सब्सिडी पर खर्च को घटाकर 3.7 लाख करोड़ रुपये (44.6 अरब डॉलर) करना भारत का लक्ष्य है। यह इस वर्ष से 26% कम है। रिपोर्ट के अनुसार कोविड-19 महामारी के कारण बढ़ते राजकोषीय घाटे पर लगाम लगाने के लिए ऐसा किया जाएगा। खाद्य और उर्वरक सब्सिडी इस वित्तीय वर्ष में भारत के 39.45 लाख करोड़ रुपये के कुल बजट खर्च का लगभग आठवां हिस्सा है, लेकिन विशेष रूप से खाद्य सब्सिडी में कटौती चुनावों के साथ राजनीतिक रूप से संवेदनशील साबित हो सकती है।
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रिपोर्ट के अनुसार सरकार को खाद्य सब्सिडी के लिए इस वर्ष के 31 मार्च तक 2.7 लाख करोड़ रुपये की तुलना में आगामी वित्त वर्ष में करीब 2.3 लाख करोड़ रुपये के बजट की उम्मीद है। सरकारी अधिकारी के अनुसार, उर्वरक सब्सिडी पर खर्च लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये तक कम होने की संभावना है। अधिकारी ने कहा कि इस साल इसकी तुलना करीब 2.3 लाख करोड़ रुपये से की जा सकती है।
सरकार अगले वित्तवर्ष के लिए खाद्य सब्सिडी को घटाकर 2.30 लाख करोड़ रुपये कर सकती है, जो चालू वित्तवर्ष में करीब 2.70 लाख करोड़ रुपये रहा है। इसी तरह, फर्टिलाइजर्स की सब्सिडी पर होने वाला खर्च भी इस साल घटाकर 1.4 लाख करोड़ रुपये किया जा सकता है, जो चालू वित्तवर्ष के लिए करीब 2.3 लाख करोड़ रुपये रहा था।
सरकार भी बढ़ते राजकोषीय घाटे को लेकर चिंतित है, जबकि चालू वित्तवर्ष के लिए इसका लक्ष्य जीडीपी का 6.4 फीसदी रखा गया है। यह लक्ष्य पिछले एक दशक के 4 और 4.5 फीसदी के मुकाबले काफी ज्यादा है। कोरोनाकाल में तो खर्च बढ़ने की वजह से 9.3 फीसदी पहुंच गया था। फिलहाल सरकार की प्लानिंग अगले वित्तवर्ष के दौरान राजकोषीय घाटे में 0.50 फीसदी कटौती करने की है।
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