केंद्र सरकार ने 08 मार्च 2026 को ‘Say No To Proxy Sarpanch’ नाम से एक सोशल मीडिया अभियान शुरू किया है। यह अभियान ‘सरपंच पति’ की प्रथा को लेकर जागरुक करने के लिए है। पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) ने इसकी घोषणा की है। यह अभियान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के मौके पर लॉन्च किया गया है। इसका मकसद ग्राम पंचायतों में महिला सरपंचों को असली ताकत देना है।
जब कोई महिला सरपंच चुनी जाती है लेकिन उसके पति या कोई पुरुष रिश्तेदार उसके नाम पर सारा काम चलाते हैं और फैसले लेते हैं तो इसी व्यवस्था को सरपंच पति व्यवस्था कहा जाता है। इसमें महिला सरपंच को दरकिनार कर दिया जाता है। इसे प्रॉक्सी लीडरशिप या छद्म नेतृत्व कहते हैं। मंत्रालय का कहना है कि यह प्रथा लोकतंत्र के खिलाफ है और महिला आरक्षण के मकसद को कमजोर करती है।
यह अभियान 18 मार्च तक चलेगा। यह राज्य पंचायती राज विभागों और पंचायत स्तर के अधिकारियों के साथ मिलकर चलाया जा रहा है। मंत्रालय चाहता है कि पूरे देश में इस प्रथा के खिलाफ जागरूकता फैले। लोग गांवों से अपनी आवाज उठाएं, असली महिला नेताओं की तारीफ करें और इस मुद्दे पर बहस शुरू करें। इससे समाज में बदलाव आएगा और चुनी हुई महिला नेताओं का सम्मान बढ़ेगा।
पिछले साल मंत्रालय ने एक सलाहकार समिति बनाई थी। यह समिति सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सितंबर 2023 में बनी थी। समिति ने कई राज्यों से बातचीत की और रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया है कि सिद्ध मामलों में कड़ी सजा दी जानी चाहिए। साथ ही हेल्पलाइन और महिला निगरानी समिति बनाई जाए, जहां गोपनीय शिकायतें की जा सकें। सही शिकायत पर सूचनादाता को इनाम भी मिले।
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