राजस्थान दिवस 2026 हर साल 30 मार्च को मनाया जाता है, जो वर्ष 1949 में राजस्थान राज्य के गठन की याद दिलाता है। यह राज्य अपने भव्य किलों, शाही विरासत और रंग-बिरंगी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह भारत का सबसे बड़ा राज्य भी है। यह दिन कई रियासतों के ऐतिहासिक एकीकरण को एक राज्य के रूप में स्थापित होने की स्मृति में मनाया जाता है। ‘राजाओं की भूमि’ के रूप में प्रसिद्ध राजस्थान वीरता, परंपरा और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है।
स्वतंत्रता से पहले राजस्थान को ‘राजपूताना’ कहा जाता था, जिसका अर्थ है ‘राजपूतों की भूमि’। यह क्षेत्र लगभग 22 रियासतों से मिलकर बना था, जो ब्रिटिश शासन के अधीन थीं। 1947 में भारत की आज़ादी के बाद इन रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करना एक बड़ी चुनौती थी।
सरदार वल्लभभाई पटेल और वी. पी. मेनन के नेतृत्व में इन रियासतों का एकीकरण किया गया। राजस्थान का गठन कई चरणों में हुआ—
इसी कारण 30 मार्च को राजस्थान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
हालांकि राजस्थान का गठन 1949 में हुआ, लेकिन इसका अंतिम स्वरूप 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम के बाद तय हुआ। इसके तहत अजमेर क्षेत्र का विलय राजस्थान में हुआ, आबू रोड तालुका को बॉम्बे राज्य से वापस जोड़ा गया और मध्य प्रदेश के साथ सीमाई समायोजन किए गए। इन बदलावों के बाद राजस्थान की वर्तमान भौगोलिक सीमाएं निर्धारित हुईं।
राजस्थान का नाम ही ‘राजाओं का निवास’ दर्शाता है। इसका कारण इसका समृद्ध शाही इतिहास, शक्तिशाली राजवंश, भव्य महल और वीरता की गाथाएं हैं। उत्तर-पश्चिम भारत में स्थित यह राज्य न केवल क्षेत्रफल में विशाल है, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत विविधतापूर्ण है। यहां के विभिन्न क्षेत्रों की अपनी अलग परंपराएं, बोलियां, कला और इतिहास हैं।
राजस्थान अपनी रंगीन संस्कृति और परंपराओं के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां के लोक नृत्य जैसे घूमर और कालबेलिया, पारंपरिक संगीत, हस्तशिल्प, खान-पान और वेशभूषा इसकी पहचान हैं।
राज्य में कई प्रसिद्ध स्थल भी हैं, जैसे—
राजस्थान दिवस केवल एक ऐतिहासिक दिन नहीं, बल्कि राज्य की पहचान और गौरव का उत्सव भी है। इस अवसर पर पूरे राज्य में सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक नृत्य, परेड, प्रदर्शनियां और पारंपरिक कला-शिल्प का प्रदर्शन किया जाता है, जो राजस्थान की समृद्ध विरासत को दर्शाता है।
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