अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (IWD), जो हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है, महिलाओं की सांस्कृतिक, राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक उपलब्धियों को पहचानने का एक वैश्विक मंच प्रदान करता है। यह दिन कार्यस्थल पर लैंगिक समानता की प्रगति और शेष चुनौतियों का आकलन करने का अवसर भी देता है।
द इकोनॉमिस्ट द्वारा संकलित ग्लास-सीलिंग इंडेक्स (GCI) 2025, कार्यरत महिलाओं के लिए सर्वश्रेष्ठ और सबसे कठिन देशों की तुलनात्मक समीक्षा प्रस्तुत करता है। इस साल स्वीडन ने आइसलैंड को पछाड़कर कार्यरत महिलाओं के लिए सर्वश्रेष्ठ देश का स्थान फिर से हासिल किया है। वहीं, जापान, तुर्की और दक्षिण कोरिया जैसी अर्थव्यवस्थाएँ सामाजिक मानदंडों और वेतन असमानता के कारण अब भी संघर्षरत हैं।
2024 में महिला राजनीतिक भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। OECD के अनुसार, संसदीय प्रतिनिधित्व में महिलाओं की औसत भागीदारी 34% हो गई, जो लैंगिक समावेशिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।
हालांकि, यह आंकड़े महिला नेतृत्व में वृद्धि को दर्शाते हैं, फिर भी कई देश अभी भी पूर्ण लैंगिक समानता प्राप्त करने से दूर हैं।
हालांकि महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है, फिर भी वेतन असमानता, पदोन्नति में भेदभाव और शीर्ष प्रबंधन में कम उपस्थिति जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
| रैंक | देश | क्षेत्र |
|---|---|---|
| 1 | फ्रांस | यूरोप |
| 2 | स्पेन | यूरोप |
| 3 | ऑस्ट्रेलिया | ओशिनिया |
| 4 | स्वीडन | यूरोप |
| 5 | पुर्तगाल | यूरोप |
| 6 | नॉर्वे | यूरोप |
| 7 | फ़िनलैंड | यूरोप |
| 8 | डेनमार्क | यूरोप |
| 9 | न्यूज़ीलैंड | ओशिनिया |
| 10 | आइसलैंड | यूरोप |
स्वीडन ने आइसलैंड को पीछे छोड़ते हुए कार्यरत महिलाओं के लिए सबसे अच्छा देश बनने का गौरव प्राप्त किया। इसके कारण हैं:
रैंकिंग के निचले स्तर पर जापान, तुर्की और दक्षिण कोरिया अभी भी कार्यस्थल पर लैंगिक असमानता से जूझ रहे हैं।
तुर्की को इस वर्ष महिलाओं के लिए सबसे कठिन कार्यस्थल वातावरण वाला देश घोषित किया गया, जिसका कारण व्यवस्थित लैंगिक भेदभाव और अपर्याप्त कार्यस्थल सुरक्षा उपाय हैं।
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