Categories: Economy

आर्थिक सर्वेक्षण 2023: भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा

केंद्रीय आम बजट 2023 से एक दिन पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में आर्थिक-सर्वेक्षण 2022-23 पेश किया, जिसके आंकड़ों के मुताबिक, विकास दर कम रहने का अनुमान जताया गया है। हालांकि, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। अगले वित्त वर्ष यानी 2023-2024 में भारत की आर्थिक विकास दर 6.5 प्रतिशत बनी रहेगी। हालांकि, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष (अप्रैल 2022 से मार्च 2023) में सात प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह पिछले साल 2021-22 के 8.7 प्रतिशत के आंकड़े से कम है।

Buy Prime Test Series for all Banking, SSC, Insurance & other exams

आर्थिक सर्वेक्षण बजट से एक दिन पहले हर साल सरकार द्वारा जारी किया जाता है। ये आर्थिक सर्वेक्षण ऐसे समय पर आया है, जब देश महंगाई और वैश्विक अस्थिरता की वजह से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में इस बार का आर्थिक सर्वेक्षण काफी महत्वपूर्ण है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि पीपीपी (क्रय शक्ति समानता) के मामले में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। विनिमय दर के मामले में पांचवां सबसे बड़ा देश है। भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार सुधार देखा जा रहा है और कोरोना काल में जो नुकसान हुआ था, काफी हद तक उसकी भरपाई कर ली गई है। जो विकास के काम रुके हुए थे, उन्हें फिर से शुरू कर दिया है।

 

आर्थिक सर्वेक्षण में आरबीआई ने अनुमान जताया है कि चालू वित्त वर्ष में महंगाई की दर 6.8 प्रतिशत का मांग पर कोई असर नहीं होगा। महंगाई की दर लंबे समय तक अधिक रहने के कारण ब्याज दरें उच्चतम स्तर पर रह सकती हैं। इकनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि करेंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को फाइनेंस करने और रुपये के उतार-चढ़ाव को मैनेज करने की खातिर फॉरेक्स मार्केट में दखल देने के लिए भारत के पास पर्याप्त फॉरेक्स रिजर्व है। इकनॉमिक सर्वे में यह भी कहा गया है कि ग्लोबल इकनॉमिक आउटलुक के लिए डाउनसाइड रिस्क बना हुआ है।

 

वित्त वर्ष 2023-24 के लिए वर्तमान कीमतों पर वृद्धि दर के 11 प्रतिशत रहने का अनुमान है। समीक्षा में कहा गया कि आगामी वित्त वर्ष के दौरान ज्यादातर वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारत की वृद्धि दर मजबूत रहेगी। ऐसा निजी खपत में सुधार, बैंकों द्वारा ऋण देने में तेजी और कंपनियों द्वारा पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी के कारण होगा। समीक्षा में कहा गया है कि मजबूत खपत के कारण भारत में रोजगार की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन रोजगार के अधिक मौके तैयार करने के लिए निजी निवेश में वृद्धि जरूरी है।

 

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

Kuno में ‘ज्वाला’ ने दिया 5 शावकों को जन्म, भारत में चीतों की संख्या 53

भारत में चीता की संख्या बढ़कर 53 हो गई है, जब नामीबिया से लाई गई…

4 hours ago

IPL 2026 शेड्यूल: तारीख, मैच लिस्ट, जगह और टीमें

इंडियन प्रीमियर लीग 2026 (IPL 2026)का सीजन टूर्नामेंट के इतिहास का सबसे बड़ा सीजन होने…

5 hours ago

मिजोरम विधानसभा ने मिजो भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव पारित किया

मिजोरम विधान सभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें मिजो भाषा को…

7 hours ago

BCCI का बड़ा फैसला, T20 वर्ल्ड चैंपियन टीम इंडिया के लिए 131 करोड़ रुपये के इनाम का किया ऐलान

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ( BCCI ) ने टीम इंडिया की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के…

7 hours ago

महाराष्ट्र विधानसभा ने प्रमुख राजस्व सुधार विधेयक पारित किए

महाराष्ट्र विधान सभा ने प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और सरकारी भूमि के बेहतर उपयोग के उद्देश्य…

8 hours ago

UP सरकार का बड़ा फैसला, 20 लाख घरों तक पहुंचेगा हाई-स्पीड इंटरनेट

उत्तर प्रदेश (UP) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'डिजिटल उत्तर प्रदेश' के विजन को साकार…

8 hours ago