चुनाव जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम पहल के तहत भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने प्रसिद्ध कलाकार नीतू चंद्रा और क्रांति प्रकाश झा को बिहार के लिए SVEEP आइकन नियुक्त किया है। राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच, जनता के बीच लोकप्रिय इन हस्तियों को जोड़ने का उद्देश्य मतदाता साक्षरता और भागीदारी को रचनात्मक तरीकों से बढ़ावा देना है। यह नियुक्ति आयोग के प्रमुख मतदाता जागरूकता अभियान SVEEP (Systematic Voters’ Education and Electoral Participation) का हिस्सा है, जो जागरूक और जिम्मेदार मतदाता तैयार करने की दिशा में काम करता है।
SVEEP कार्यक्रम की शुरुआत निर्वाचन आयोग ने इसलिए की थी ताकि मतदाता जागरूकता की खामियों को दूर किया जा सके और प्रत्येक पात्र नागरिक को यह समझाया जा सके कि उसका वोट कितना महत्वपूर्ण है। वर्षों में यह अभियान एक बहु-आयामी शिक्षा पहल में बदल चुका है, जिसमें मल्टीमीडिया, सांस्कृतिक माध्यमों और जनप्रिय हस्तियों का उपयोग कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है। विशेष रूप से यह अभियान उन क्षेत्रों को लक्ष्य बनाता है जहां मतदान प्रतिशत कम होता है या उदासीनता अधिक होती है।
लोकप्रिय कलाकारों का समाज पर विशेषकर युवाओं और नए मतदाताओं पर गहरा प्रभाव पड़ता है। नीतू चंद्रा और क्रांति प्रकाश झा को SVEEP आइकन के रूप में नियुक्त कर आयोग इनकी लोकप्रियता और स्थानीय जुड़ाव (पटना और भागलपुर से) का लाभ उठाकर मतदाता भागीदारी को प्रोत्साहित करना चाहता है। इससे पहले, मैथिली लोकगायिका मैथिली ठाकुर को 2023 में इसी उद्देश्य से नियुक्त किया गया था, जो दर्शाता है कि आयोग लगातार स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तित्वों का उपयोग कर रहा है।
आगामी चुनावों में मतदान प्रतिशत को बढ़ाना।
लोकप्रिय चेहरों के माध्यम से मतदाता शिक्षा को सरल और प्रभावी बनाना।
टीवी, रेडियो, सोशल मीडिया, जनसभाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों जैसे विभिन्न मंचों के जरिए जनसंचार को बढ़ावा देना।
सूचित, नैतिक और समावेशी मतदान की संस्कृति को प्रोत्साहित करना।
नीतू चंद्रा पटना की मूल निवासी हैं और कई भारतीय भाषाओं के साथ-साथ हॉलीवुड फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं। वे एक प्रशिक्षित मार्शल आर्टिस्ट, शास्त्रीय नृत्यांगना और खिलाड़ी भी हैं, जिससे वे एक बहुआयामी प्रभावशाली व्यक्तित्व बन जाती हैं।
क्रांति प्रकाश झा, भागलपुर से हैं और बाटला हाउस, एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी और सम्राट पृथ्वीराज जैसी फिल्मों में नजर आ चुके हैं। उनका ग्रामीण जुड़ाव और सिनेमाई प्रभाव बिहार के विविध मतदाता वर्गों में अच्छी तरह गूंजेगा।
सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय आंकड़ों पर आधारित कस्टम अभियान।
स्थानीय प्रभावशाली लोगों, पारंपरिक मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग।
महिलाओं, दिव्यांगों और हाशिये के समूहों की भागीदारी को प्राथमिकता।
पिछले मतदान आंकड़ों का विश्लेषण कर कमजोर मतदान क्षेत्रों पर विशेष ध्यान।
यह पहल न केवल चुनावी भागीदारी को बढ़ाएगी बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को समाज में गहराई से स्थापित करने में भी सहायक होगी।
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