रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation- DRDO) ने संयुक्त रूप से भारतीय वायु सेना (IAF) के लड़ाकू विमानों को दुश्मन के रडार खतरों से बचाने के लिए एक उन्नत चाफ प्रौद्योगिकी (advanced chaff technology) विकसित की है। रक्षा प्रयोगशाला, जोधपुर और उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (High Energy Materials Research Laboratory – HEMRL), पुणे ने भारतीय वायुसेना की गुणात्मक आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भूसा कारतूस विकसित किया है। भारतीय वायु सेना ने सफल उपयोगकर्ता परीक्षणों के पूरा होने के बाद इस तकनीक को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
Buy Prime Test Series for all Banking, SSC, Insurance & other exams
चाफ प्रौद्योगिकी क्या है?
चाफ मुख्य रूप से एक इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-माप तकनीक है जिसका उपयोग दुनिया भर में सेना द्वारा उच्च मूल्य के लक्ष्यों जैसे कि लड़ाकू जेट या नौसेना के जहाजों को रडार और रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) दुश्मन मिसाइलों के मार्गदर्शक तंत्र से बचाने के लिए किया जाता है। हवा में तैनात चाफ मिसाइल मार्गदर्शन प्रणाली के लिए कई लक्ष्यों के रूप में दर्शाता है, इस प्रकार दुश्मन के राडार को गुमराह करता है या विरोधी मिसाइलों को विक्षेपित करता है। चाफ एक महत्वपूर्ण रक्षा तकनीक है जिसका उपयोग लड़ाकू विमानों को शत्रुतापूर्ण रडार खतरों से बचाने के लिए किया जाता है।
सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण टेकअवे:
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 01 फरवरी 2026 को आज बजट 2026 पेश किया है।…
एलेना रिबाकिना ने मेलबर्न में खेले गए ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 के महिला एकल फाइनल में…
एक शोध दल ने बताया है कि उन्होंने प्रयोगशाला में चूहों में अग्नाशय कैंसर (Pancreatic…
भारत का कृषि क्षेत्र एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहाँ अब केवल…
गुजरात ने ग्रामीण शासन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है।…
भारत का बहुप्रतीक्षित मानव अंतरिक्ष उड़ान सपना अब अपने सबसे निर्णायक चरण में प्रवेश कर…