भारत की पहली मौखिक गर्भनिरोधक ‘सहेली’ की खोज करने वाली केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई) की पूर्व निदेशक डॉ. नित्या आनंद (Dr Nitya Anand) का शनिवार को एसजीपीजीआईएमएस लखनऊ में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 99 वर्ष के थे।
डॉ. आनंद ने सहेली बनाई, एक अनोखी जन्म नियंत्रण गोली, जो सप्ताह में एक बार इस्तेमाल की जाती है और बिना स्टेरॉयड या हार्मोन के। इसे 1986 में प्रधान मंत्री राजीव गांधी द्वारा पेश किया गया था। 2016 में सहेली भारत के राष्ट्रीय परिवार कार्यक्रम का हिस्सा बनी। यह अभी भी दुनिया में अपनी तरह की एकमात्र गोली है।
डॉ. आनंद ने भारत सरकार के साथ दवा नीतियों पर लगभग 40 वर्षों तक काम किया। उन्होंने कई विज्ञान समूहों को भी सलाह दी।
डॉ. आनंद को पद्मश्री पुरस्कार मिला। वह अपने पीछे अपनी बेटी डॉ. सोनिया नित्यानंद और दो बेटे नीरज और डॉ. नवीन आनंद छोड़ गए हैं।
केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई), लखनऊ की पूर्व निदेशक और देश की पहली गर्भनिरोधक गोली सहेली बनाने वाली वैज्ञानिक पद्मश्री पुरस्कार विजेता डॉ. नित्या आनंद का 99 वर्ष की आयु में निधन हो गया। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
तब से विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा था। इस बीच संक्रमण बढ़ने पर उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट भी दिया गया। डॉक्टरों के मुताबिक शनिवार को इलाज के दौरान सेप्टिक शॉक के कारण उनकी मौत हो गई। डॉ . नित्या आनंद के तीन बच्चे हैं।
आईआईटी कानपुर से पढ़े नीरज नित्यानंद अमेरिका में हैं। उनका छोटा बेटा नवीन कनाडा में है और वैक्सीन के क्षेत्र में काम कर रहा है। छोटी बेटी डॉ . सोनिया नित्यानंद किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) की कुलपति और लोहिया इंस्टीट्यूट की निदेशक हैं।
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