इसरो के पूर्व प्रमुख कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन का निधन

इसरो के पूर्व अध्यक्ष कृष्णस्वामी कस्तूरीरंगन  का 25 अप्रैल 2025 को बेंगलुरु में 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे भारत के वैज्ञानिक और शैक्षिक परिदृश्य में सबसे अधिक सम्मानित व्यक्तित्वों में से एक थे। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, डॉ. कस्तूरीरंगन ने सुबह 10:43 बजे बेंगलुरु स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर को रविवार, 27 अप्रैल को सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI) में आम जनता के अंतिम दर्शन हेतु रखा जाएगा।

इसरो के पूर्व अध्यक्ष और भारत के अग्रणी अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. के. कस्तूरीरंगन का कार्यकाल देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक स्वर्णिम युग माना जाता है। वे 1994 से 2003 तक इसरो के पाँचवें अध्यक्ष रहे और इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष विभाग के सचिव का दायित्व भी निभाया। इसरो के साथ उनका चार दशकों का जुड़ाव कई ऐतिहासिक मिशनों और संस्थागत विकासों का साक्षी रहा।

भास्कर उपग्रहों से शुरुआत
डॉ. कस्तूरीरंगन ने भारत के पहले दो पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों — भास्कर-1 और भास्कर-2 — के परियोजना निदेशक के रूप में कार्य किया। उनके मार्गदर्शन में इसरो ने पहला परिचालन पृथ्वी अवलोकन उपग्रह IRS-1A लॉन्च किया, जो इस क्षेत्र में भारत की नींव बना।

PSLV और GSLV का विकास
अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में PSLV (पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) को पूरी तरह से परिचालन स्तर पर लाना शामिल है। यह अब भारत के उपग्रह प्रक्षेपण कार्यक्रम की रीढ़ बन चुका है। उन्होंने GSLV (जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) के पहले सफल परीक्षण को भी साकार किया, जो भारत की तकनीकी क्षमताओं में एक बड़ा कदम था।

इसरो सैटेलाइट सेंटर के निदेशक के रूप में
इस पद से पहले उन्होंने इसरो सैटेलाइट सेंटर के निदेशक के रूप में कार्य किया और INSAT-2 सीरीज, IRS-1A/1B, और वैज्ञानिक अनुसंधान उपग्रहों सहित कई अगली पीढ़ी के उपग्रहों का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व में लॉन्च हुए IRS-1C और IRS-1D उपग्रह उस समय के सर्वश्रेष्ठ नागरिक उपग्रहों में माने गए। उन्होंने महासागरीय उपग्रह IRS-P3 और P4 के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

शिक्षा और नीति में योगदान
डॉ. कस्तूरीरंगन ने मुंबई विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। उन्होंने 1971 में अहमदाबाद के फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी से उच्च ऊर्जा खगोलशास्त्र में पीएचडी पूरी की। वे राज्यसभा के मनोनीत सदस्य रहे और योजना आयोग का भी हिस्सा बने।

नई शिक्षा नीति के वास्तुकार
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रारूप समिति की अध्यक्षता की, जो भारत की शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में एक क्रांतिकारी दस्तावेज माना जाता है। इसके अतिरिक्त उन्होंने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे (NCF) के लिए गठित 12-सदस्यीय संचालन समिति का भी नेतृत्व किया।

पर्यावरण संरक्षण में भूमिका
डॉ. कस्तूरीरंगन ने 2013 में वेस्टर्न घाट्स पर प्रसिद्ध रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने छह राज्यों — कर्नाटक, गुजरात, गोवा, तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र — में फैले 59,940 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पारिस्थितिक दृष्टि से संवेदनशील घोषित करने की सिफारिश की थी।

सम्मान और राष्ट्रीय पहचान
देश के वैज्ञानिक, शैक्षणिक और नीतिगत क्षेत्रों में अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें भारत के तीनों सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त हुए:

  • पद्मश्री

  • पद्मभूषण

  • पद्मविभूषण

डॉ. कस्तूरीरंगन का जीवन एक प्रेरणा है — एक वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, नीति निर्माता और पर्यावरण संरक्षक के रूप में।

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vikash

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