आकाश हमें अक्सर मनमोहक घटनाओं से चकित करता है, और ग्रहण उनमें से सबसे रोचक घटनाओं में गिने जाते हैं। सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों तभी होते हैं जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा विशेष ढंग से एक सीध में आ जाते हैं। हालांकि इन दोनों घटनाओं में वही तीन खगोलीय पिंड शामिल होते हैं, फिर भी ये एक-दूसरे से बिल्कुल अलग दिखते हैं और अलग ढंग से अनुभव किए जाते हैं। आइए जानें कि इनमें क्या अंतर है, क्या समानताएँ हैं और ये क्यों महत्वपूर्ण हैं।
सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है, जिससे सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक नहीं पहुँच पाती। ग्रहण किस प्रकार का होगा यह इस संरेखण (alignment) पर निर्भर करता है:
पूर्ण सूर्य ग्रहण – जब सूर्य पूरी तरह ढक जाता है।
आंशिक सूर्य ग्रहण – जब सूर्य का केवल कुछ भाग ढकता है।
कंकणाकृति (वलयाकार) सूर्य ग्रहण – जब चंद्रमा सूर्य के केंद्र को ढक लेता है और चारों ओर चमकदार अंगूठी जैसा प्रकाश दिखाई देता है।
सूर्य ग्रहण कुछ ही मिनटों तक रहता है और इसे केवल पृथ्वी के कुछ विशेष क्षेत्रों से देखा जा सकता है। सूर्य की तेज रोशनी के कारण इसे देखने के लिए विशेष सोलर चश्मे की आवश्यकता होती है।
चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इसके प्रकार हैं:
पूर्ण चंद्र ग्रहण – जब पूरा चंद्रमा पृथ्वी की छाया में आकर लालिमा लिए दिखाई देता है (इसे अक्सर “रक्त चंद्र” कहा जाता है)।
आंशिक चंद्र ग्रहण – जब केवल चंद्रमा का कुछ हिस्सा छाया में आता है।
उपछाया चंद्र ग्रहण (पेनुम्ब्रल) – जब चंद्रमा पर हल्की छाया पड़ती है और वह थोड़ा धुंधला दिखता है।
चंद्र ग्रहण की अवधि सूर्य ग्रहण से कहीं लंबी होती है – कई बार यह कुछ घंटों तक चलता है। यह वहाँ से दिखाई देता है जहाँ भी रात होती है, और इसे नंगी आँखों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है।
सूर्य ग्रहण: चंद्रमा सूर्य की रोशनी को रोककर पृथ्वी पर छाया डालता है।
चंद्र ग्रहण: पृथ्वी सूर्य की रोशनी को रोककर चंद्रमा पर छाया डालती है।
दोनों घटनाएँ सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा के कारण होती हैं, लेकिन इनमें दृश्यता, अवधि और स्वरूप अलग-अलग होते हैं।
| अंतर का आधार | सूर्य ग्रहण | चंद्र ग्रहण |
| कारण | चंद्रमा सूर्य की रोशनी को रोकता है | पृथ्वी सूर्य की रोशनी को चंद्रमा तक पहुँचने से रोकती है |
| कहाँ दिखाई देता है? | केवल पृथ्वी के कुछ विशेष हिस्सों में | जहाँ भी रात होती है वहाँ से |
| प्रकार | पूर्ण, आंशिक, कंकणाकृति (वलयाकार) | पूर्ण, आंशिक, उपछाया (पेनुम्ब्रल) |
| अवधि | कुछ मिनट | कई घंटे तक |
| सुरक्षा | विशेष चश्मे से ही सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है | नंगी आँखों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है |
| प्रभाव | दिन में अंधकार, तापमान में गिरावट | चंद्रमा का रंग बदलता है, अक्सर लालिमा लिए दिखाई देता है |
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