
दिल्ली पुलिस 6 साल से अधिक की सजा के साथ दंडनीय अपराधों में फोरेंसिक साक्ष्य के संग्रह (collection of forensic evidence) को अनिवार्य बनाने वाली देश की पहली पुलिस बन गई है। बता दें यह सजा दर बढ़ाने एवं आपराधिक न्याय प्रणाली को फोरेंसिक विज्ञान जांच के साथ एकीकृत करने हेतु किया गया है।
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दिल्ली पुलिस ने आपराधिक न्याय प्रणाली को फोरेंसिक विज्ञान जांच के साथ एकीकृत किया है तथाअपने अधिकारियों को प्रशिक्षित करने के लिए राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय, गांधीनगर के साथ सहयोग किया है।
फोरेंसिक साक्ष्य के संग्रह से संबंधित प्रमुख बिंदु
- गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जोनल काउंसिल की बैठक में जोर देने के बाद यह आदेश लागू हुआ।
- आंचलिक परिषद की बैठक में अमित शाह ने बताया कि सरकार ब्रिटिश काल की भारतीय दंड संहिता में बदलाव करने जा रही है।
- आपराधिक मामलों में आपराधिक मामलों में फोरेंसिक साक्ष्य के संग्रह को अनिवार्य बनाने में परिवर्तन प्रारंभिक कदमों में से एक था।
- गृह मंत्री अमित शाह ने इस तथ्य पर जोर दिया कि हिरासत में यातना की जड़ें औपनिवेशिक भारत में हैं, हालांकि, फोरेंसिक साक्ष्य के आधार पर एक अपराधी की सजा हासिल की जा सकती है।
- दिल्ली पुलिस के आदेश से यह भी पता चलता है कि प्रत्येक जिले में बल की अपनी ‘मोबाइल क्राइम टीम वैन’ है।
- मौके पर वैज्ञानिक और फोरेंसिक सहायता प्रदान करने के लिए प्रत्येक जिले को फोरेंसिक मोबिल वैन आवंटित की जाएगी।
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