दिल्ली ने हाईवे प्रदूषण से लड़ने हेतु भारत का पहला माइक्रोएल्गी एयर टावर लगाया

नई दिल्ली में प्योरएयर टॉवर (PureAir Tower) नामक भारत का पहला माइक्रोएल्गी आधारित एयर प्यूरीफिकेशन टॉवर तैनात किया गया है। इसे एरोसिटी राजमार्ग कॉरिडोर (Aerocity Highway Corridor) के सड़क डिवाइडर पर लगाया गया है। यह एक नवीन बायोटेक्नोलॉजी आधारित समाधान है जिसका उद्देश्य शहरी वायु प्रदूषण को कम करना है। इस परियोजना के तहत पारंपरिक सड़क ढांचे को एक सक्रिय वायु शुद्धिकरण प्रणाली में बदल दिया गया है। यह पायलट परियोजना राजधानी के व्यस्त ट्रैफिक कॉरिडोर में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए शुरू की गई है।

माइक्रोएल्गी एयर टॉवर कैसे काम करता है

पारंपरिक स्मॉग टावरों की तरह यांत्रिक फिल्टर का उपयोग करने के बजाय यह तकनीक फोटोसिंथेटिक माइक्रोएल्गी (सूक्ष्म शैवाल) का उपयोग करती है, जो आसपास की हवा से प्रदूषकों को सीधे अवशोषित करती है। यह प्रणाली कार्बन डाइऑक्साइड, पार्टिकुलेट मैटर और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे प्रदूषकों को सड़क स्तर पर पकड़ती है। इसके बाद प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया के माध्यम से ये प्रदूषक ऑक्सीजन और एल्गल बायोमास में परिवर्तित हो जाते हैं। माइक्रोएल्गी एयर टॉवर बहुत कम ऊर्जा का उपयोग करता है और इसमें कोई द्वितीयक फिल्टर कचरा भी उत्पन्न नहीं होता, जिससे यह एक पर्यावरण-अनुकूल वायु शुद्धिकरण समाधान बन जाता है।

परियोजना से जुड़ी कंपनियाँ

दिल्ली में स्थापित यह माइक्रोएल्गी एयर टॉवर कई संस्थाओं के सहयोग से विकसित किया गया है। इस परियोजना को सी पी अरोड़ा प्राइवेट लिमिटेड ने कार्बेलिम ​​प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर कार्यान्वित किया है। कार्बेलिम एक क्लाइमेट-टेक स्टार्ट-अप है, जिसे आईआईटी मद्रास में इनक्यूबेट किया गया है और इसे आईआईएम लखनऊ एंटरप्राइज़ इनक्यूबेशन सेंटर का समर्थन प्राप्त है।

रोड डिवाइडर से कार्बन सिंक तक

PureAir Tower माइक्रोएल्गी प्रणाली साधारण सड़क डिवाइडर को एक सक्रिय पर्यावरणीय समाधान में बदल देती है। प्रत्येक टॉवर की वायु शुद्धिकरण क्षमता लगभग 15 परिपक्व पेड़ों के बराबर मानी जाती है और यह गुजरने वाले वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को लगातार कम करता है। इस परियोजना में आगे BioDivider पैनलों को भी स्थापित करने की योजना है, जिससे सड़क डिवाइडरों को निरंतर हरित कॉरिडोर में बदला जा सके।

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vikash

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