भारत की समुद्री कूटनीति ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में अभ्यास MILAN-2026 के 13वें संस्करण का उद्घाटन किया। इस प्रतिष्ठित बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास में 74 देशों की भागीदारी रही, जो इसके इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा और सबसे समावेशी संस्करण है।
रक्षा मंत्री ने नौसेना प्रमुखों, रक्षा प्रतिनिधियों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि MILAN-2026 वैश्विक समुद्री समुदाय के भारत पर एक जिम्मेदार और विश्वसनीय समुद्री साझेदार के रूप में भरोसे का प्रतीक है। इतनी व्यापक भागीदारी भारत की इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और उससे आगे बढ़ती प्रतिष्ठा को दर्शाती है।
13वां संस्करण कई कारणों से विशेष है—
रक्षा मंत्री ने कहा कि इतनी अभूतपूर्व भागीदारी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भारत की समुद्री दृष्टि और नेतृत्व पर विश्वास को दर्शाती है।
1. नौसेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) को मजबूत करना
2. पेशेवर दक्षता में वृद्धि
MILAN के माध्यम से सर्वोत्तम प्रथाओं, सामरिक सिद्धांतों और परिचालन अनुभवों का आदान-प्रदान होता है, जिससे भाग लेने वाली सेनाओं के पेशेवर मानकों में सुधार होता है।
3. समुद्री सुरक्षा सहयोग
वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में समुद्री चुनौतियाँ शामिल हैं—
MILAN जैसे संयुक्त अभ्यास नौसेनाओं को मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियानों के लिए तैयार करते हैं।
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि MILAN का क्षेत्रीय पहल से वैश्विक मंच तक पहुँचना भारत की सतत और विश्वसनीय समुद्री कूटनीति का प्रमाण है।
भारत की समुद्री नीति निम्न सिद्धांतों पर आधारित है—
MILAN की मेजबानी कर भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक “नेट सुरक्षा प्रदाता” (Net Security Provider) के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करता है।
विशाखापत्तनम, जिसे “पूर्वी तट का रत्न” भी कहा जाता है, रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है—
यहाँ MILAN-2026 का आयोजन भारत के पूर्वी समुद्री फोकस और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी बढ़ती रणनीतिक भूमिका को दर्शाता है।
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