CSIR–NIScPR ने जनवरी 2026 में अपना पाँचवाँ स्थापना दिवस (14 जनवरी 2026) मनाया। इस अवसर पर संस्थान ने विज्ञान संचार, साक्ष्य-आधारित नीति अनुसंधान तथा पारंपरिक ज्ञान के सत्यापन में अपनी बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि किस प्रकार संस्थान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), बहुभाषी पहुँच और वैश्विक सहभागिता के माध्यम से भारत के विकसित होते विज्ञान-नीति परिदृश्य को सशक्त बना रहा है।
क्यों चर्चा में?
CSIR-NIScPR ने अपना 5वाँ स्थापना दिवस मनाया, जिसमें विज्ञान संचार, AI एकीकरण, पारंपरिक ज्ञान के सत्यापन और नीति अनुसंधान से जुड़ी पहलों को प्रदर्शित किया गया। साथ ही SVASTIK वेब पोर्टल का शुभारंभ भी किया गया।
CSIR-NIScPR के बारे में
- CSIR–National Institute of Science Communication and Policy Research परिषद्-ए-वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान (CSIR) के अंतर्गत एक प्रमुख संस्थान है।
- यह विज्ञान संचार, विज्ञान नीति अनुसंधान और पारंपरिक ज्ञान के सत्यापन पर कार्य करता है।
- संस्थान वैज्ञानिक अनुसंधान, नीति-निर्माताओं और समाज के बीच सेतु (ब्रिज) की भूमिका निभाता है।
विज्ञान संचार की दृष्टि और AI का एकीकरण
- निदेशक गीता वाणी रायसम ने अपने संबोधन में संस्थान की विज्ञान संचार में विरासत और भविष्य-उन्मुख दृष्टि को रेखांकित किया।
- उन्होंने वैश्विक संस्थानों के साथ सहयोग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर बल दिया, विशेषकर भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं में विज्ञान संचार को सशक्त बनाने के लिए, ताकि समावेशिता और सामाजिक प्रभाव बढ़ाया जा सके।
पारंपरिक ज्ञान और नीति अनुसंधान की मजबूती
- कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL) रहा।
- विश्वजननी जे. सत्तीगेरी, प्रमुख, CSIR-TKDL इकाई, ने TKDL को भारत के पारंपरिक ज्ञान के सत्यापन की एक अद्वितीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य प्रणाली बताया।
- TKDL के पूर्ण डिजिटलीकरण के बाद, CSIR-NIScPR उन्नत अनुसंधान उपकरणों का उपयोग कर साक्ष्य-आधारित नीति अनुसंधान को और सुदृढ़ करने की स्थिति में है।
ANRF का दृष्टिकोण और वैश्विक आकांक्षाएँ
- मुख्य अतिथि शिवकुमार कल्याणरमन, सीईओ, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) ने भारत को वैश्विक अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में NIScPR की भूमिका की सराहना की।
- उन्होंने संस्थान को “वैश्विक सोच” अपनाने, तथा वैज्ञानिकों, अभियंताओं और AI विशेषज्ञों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
- साथ ही, उन्होंने अनुसंधान निष्कर्षों को सरल बनाने और सार्वजनिक प्रभाव बढ़ाने हेतु ANRF के Saral AI टूल के उपयोग का सुझाव दिया।
SVASTIK का शुभारंभ और ज्ञान प्रसार
- इस अवसर पर SVASTIK वेब पोर्टल का औपचारिक शुभारंभ किया गया।
- CSIR-NIScPR द्वारा क्रियान्वित SVASTIK एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक रूप से सत्यापित पारंपरिक ज्ञान का प्रसार करना है।
- यह पोर्टल अंग्रेज़ी, 19 भारतीय भाषाओं और 5 विदेशी भाषाओं में सामग्री उपलब्ध कराता है, जिससे पहुंच, समावेशिता और अंतरराष्ट्रीय पहुँच में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।


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