हाल ही में The Lancet Global Health में प्रकाशित एक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान से 2050 तक दुनिया भर में शारीरिक गतिविधि के स्तर में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। भारत में इसका प्रभाव वैश्विक औसत से अधिक होने की संभावना है। अत्यधिक गर्मी के कारण बाहर की गतिविधियाँ सीमित होंगी, जिससे व्यायाम कम होगा और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ेगा।
बढ़ते तापमान और लगातार आने वाली हीटवेव (लू) के कारण भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देशों में बाहरी गतिविधियाँ करना कठिन होता जा रहा है। गर्मी के बढ़ते प्रभाव के चलते लोग बाहर व्यायाम करने से बचते हैं, जिससे दैनिक शारीरिक गतिविधि में धीरे-धीरे कमी आती है। अध्ययन के अनुसार, 2050 तक भारत में वयस्कों में शारीरिक निष्क्रियता लगभग 2 प्रतिशत तक बढ़ सकती है, जो वैश्विक प्रवृत्ति से अधिक है। यह बदलाव छोटा दिख सकता है, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, अत्यधिक गर्मी की स्थिति में लोग दिन के समय चलना, व्यायाम करना और बाहर काम करना कम कर देते हैं। इससे कैलोरी खर्च कम होता है और निष्क्रिय जीवनशैली बढ़ती है। वर्तमान में दुनिया भर में लगभग हर तीन में से एक वयस्क World Health Organization के शारीरिक गतिविधि मानकों को पूरा नहीं करता। भविष्य में जलवायु परिवर्तन इस समस्या को और गंभीर बना सकता है, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं।
शारीरिक निष्क्रियता कई गंभीर बीमारियों से जुड़ी है, जैसे हृदय रोग, Type 2 Diabetes, मोटापा और कुछ प्रकार के कैंसर। इसके अलावा, यह मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है, जिससे तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं। अध्ययन के अनुसार, इन सभी कारकों के कारण वैश्विक स्तर पर लाखों समयपूर्व मौतों का खतरा बढ़ सकता है।
जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य के बीच संबंध लगातार मजबूत होता जा रहा है। बढ़ता तापमान लोगों की दैनिक आदतों को प्रभावित करता है और जीवनशैली संबंधी बीमारियों के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ पैदा करता है। शहरी क्षेत्रों में, जहाँ पहले से ही निष्क्रिय जीवनशैली आम है, यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
World Health Organization के अनुसार, स्वस्थ वयस्कों को प्रति सप्ताह कम से कम 150–300 मिनट मध्यम तीव्रता की शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। इसमें चलना, साइकिल चलाना या खेल-कूद जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं, जो हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाती हैं और दीर्घकालिक बीमारियों के जोखिम को कम करती हैं।
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