चीन ने शेनझोउ-21 (Shenzhou-21) अंतरिक्ष यान को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर अपने तेज़ी से बढ़ते अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक और उपलब्धि दर्ज की है। यह प्रक्षेपण गॉबी मरुस्थल स्थित जिउक्वान उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र (Jiuquan Satellite Launch Centre) से स्थानीय समयानुसार रात 11:44 बजे (1544 GMT) पर किया गया। लॉन्ग मार्च-2F रॉकेट (Long March-2F) के ज़रिए अंतरिक्ष में भेजे गए इस यान को कुछ ही घंटों में तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन (Tiangong Space Station) से जुड़ना है।
इस मिशन के दल में शामिल हैं —
कमांडर झांग लू (Zhang Lu)
इंजीनियर वू फेई (Wu Fei)
विशेषज्ञ झांग होंगझांग (Zhang Hongzhang)
ये तीनों छह महीनों तक कक्षा में रहकर वैज्ञानिक अनुसंधान और रखरखाव कार्य करेंगे।
32 वर्षीय वू फेई (Wu Fei) ने इतिहास रचते हुए चीन के सबसे युवा अंतरिक्ष यात्री बनने का गौरव प्राप्त किया है।
उनकी भागीदारी चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम में नई पीढ़ी के अंतरिक्ष यात्रियों के उदय का प्रतीक है।
यह कदम दर्शाता है कि चीन अपने भविष्य के चंद्र और ग्रह मिशनों के लिए युवाओं को तैयार करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
वू फेई का चयन चीन की दीर्घकालिक अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं में प्रशिक्षित और सक्षम मानव संसाधन विकसित करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
शेनझोउ-21 मिशन एक अनोखा वैज्ञानिक पेलोड लेकर गया है — इसमें चार प्रयोगशाला चूहे (दो नर और दो मादा) शामिल हैं।
यह चीन का पहला जैविक अंतरिक्ष प्रयोग है जिसमें स्तनधारियों (mammals) का उपयोग किया जा रहा है।
वैज्ञानिक यह अध्ययन करेंगे कि सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण (microgravity) का शरीर और प्रजनन पर क्या प्रभाव पड़ता है — यह जानकारी दीर्घकालिक अंतरिक्ष यात्राओं के लिए अत्यंत उपयोगी होगी।
इसके साथ ही, अंतरिक्ष यात्री —
स्पेसवॉक (अंतरिक्ष भ्रमण) करेंगे,
एंटी-डिब्रिस शील्ड (अंतरिक्ष मलबा सुरक्षा कवच) स्थापित करेंगे,
और शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से चीन के युवाओं में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि जगाएँगे।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) की “स्पेस ड्रीम” परिकल्पना के तहत चीन एक वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
2019 में चांग-ए-4 (Chang’e-4) यान को चंद्रमा के दूर वाले हिस्से पर सफलतापूर्वक उतारा गया।
2021 में मंगल ग्रह पर रोवर (Rover) भेजा गया।
अब चीन का लक्ष्य है कि 2030 तक चंद्रमा पर मानव मिशन भेजा जाए।
2022 में पूरा हुआ तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन चीन का स्थायी कक्षीय ठिकाना है —
जहाँ वैज्ञानिक अनुसंधान, नई तकनीकों का परीक्षण, और भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए प्रशिक्षण किया जाता है।
2011 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से बाहर किए जाने के बाद, चीन ने अपना स्वतंत्र अंतरिक्ष मंच तैयार किया और पाकिस्तान सहित कई देशों के साथ सहयोग शुरू किया।
शेनझोउ-21 मिशन चीन की वैज्ञानिक प्रगति के साथ-साथ उसकी स्वतंत्र अंतरिक्ष क्षमता का भी प्रमाण है।
इस मिशन के प्रयोग और प्रशिक्षण गतिविधियाँ चीन को गहरे अंतरिक्ष अभियानों (Deep Space Missions) की तैयारी में मदद करेंगी।
इस सफलता के साथ, चीन ने एक बार फिर यह साबित किया है कि वह विश्व के प्रमुख अंतरिक्ष राष्ट्रों (Leading Spacefaring Nations) में अपनी स्थिति को और मजबूत कर रहा है।
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