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चंद्रयान-3 को चांद तक पहुंचाने में इन 6 वैज्ञानिकों की है महत्वपूर्ण भूमिका

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भारत के लिए ये एक बहुत ही ऐतिहासिक पल है, जब चांद पर हमारा तिरंगा लहरा रहा है। चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम ने सफलतापूर्वक चांद के साउथ पोल पर लैंडिग कर ली है। चंद्रयान 3 मिशन के प्रमुख चेहरों में इसरो चीफ एस. सोमनाथ समेत कई अंतरिक्षा वैज्ञानिक हैं। मिशन के डायरेक्टर मोहन कुमार हैं और रॉकेट निदेश बीजू सी. थॉमस हैं। इसरो के वैज्ञानिक पिछले 4 साल से चंद्रयान-3 सैटेलाइट पर काम कर रहे थे। जिस समय देश में कोविड-19 महामारी फैली हुई थी, उस समय भी इसरो की टीम भारत के मिशन मून की तैयारी में जुटी थी।

चंद्रयान-3 को सफल बनाने में एस सोमनाथ के अलावा प्रोजेक्ट डायरेक्टर पी वीरमुथुवेल, मिशन डायरेक्टर मोहना कुमार, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) के निदेशक एस उन्नीकृष्णन नायर, यू आर राव सैटेलाइट सेंटर (URSC) के निदेशक एम शंकरन और लॉन्च ऑथराइजेशन बोर्ड (LAB) प्रमुख ए राजराजन ने भी अहम किरदार निभाया। बता दें, 23 अगस्त को विक्रम लैंडर ने चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग की थी। इसी के साथ भारत दुनिया का पहला देश बन गया, जिसने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग की है।

 

चंद्रयान-3 में काम करने वाले वैज्ञानिक इस प्रकार हैं:

 

डॉ. एस. सोमनाथ, अध्यक्ष, इसरो

 

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अधिकांश हिंदू नाम भगवान का प्रतीक होता है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष एस. सोमनाथ के मामले में, नाम का अर्थ चंद्रमा का स्वामी है। इसरो के प्रमुख के रूप में, सोमनाथ ने उन मुद्दों को ठीक कर दिया है, जिसके चलते भारत के पहले चंद्रमा लैंडर विक्रम की क्रैश लैंडिंग हुई थी। बता दें सोमनाथ की रुचि विज्ञान में थी। बाद में उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया लेकिन रॉकेट्री में उनकी सक्रिय रुचि थी। 1985 में सोमनाथ को इसरो में नौकरी मिल गई और वे तिरुवनंतपुरम में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) में शामिल हो गए, जो रॉकेट के लिए जिम्मेदार था। सोमनाथ ने टीकेएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, कोल्लम से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक और स्ट्रक्चर्स, डायनेमिक्स और कंट्रोल में विशेषज्ञता के साथ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलोर से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री ली। इसरो अध्यक्ष बनने से पहले, सोमनाथ निदेशक के रूप में वीएसएससी के प्रमुख थे।

 

डॉ. एस. उन्नीकृष्णन नायर, निदेशक, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र

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डॉ. एस. उन्नीकृष्णन नायर भारत के रॉकेट केंद्र विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) के प्रमुख एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक होने के साथ-साथ एक मलयालम लघु कथाकार भी हैं। उन्होंने केरल विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक, भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एमई और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-मद्रास से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। उन्नीकृष्णन ने 1985 में वीएसएससी में अपना करियर शुरू किया और भारतीय रॉकेट – पीएसएलवी, जीएसएलवी और एलवीएम 3 के लिए विभिन्न एयरोस्पेस प्रणालियों और तंत्रों के विकास में शामिल थे। वे 2004 से मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के अध्ययन चरण से जुड़े हुए थे और प्री-प्रोजेक्ट प्रौद्योगिकी विकास गतिविधियों के लिए परियोजना निदेशक थे। इसरो में सबसे युवा केंद्र, मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र (एचएसएफसी) के संस्थापक निदेशक के रूप में उन्नीकृष्णन ने गगनयान परियोजना के लिए टीम का नेतृत्व किया है और बेंगलुरु में एचएसएफसी में अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की है।

 

डॉ. पी. वीरमुथुवेल, परियोजना निदेशक, चंद्रयान-3

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तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले के रहने वाले, वीरमुथुवेल ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में अपना डिप्लोमा पूरा किया और इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की। बाद में उन्होंने आईआईटी-मद्रास से पीएचडी की। वह 2014 में इसरो में शामिल हुए।

 

एम. शंकरन, निदेशक, यू आर राव सैटेलाइट सेंटर

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वैज्ञानिक एम. शंकरन ने 1 जून, 2021 को इसरो के सभी उपग्रहों के डिजाइन, विकास और कार्यान्वयन के लिए देश के अग्रणी केंद्र, यू आर राव सैटेलाइट सेंटर (यूआरएससी) के निदेशक के रूप में पदभार संभाला। वे वर्तमान में संचार, नेविगेशन, रिमोट सेंसिंग, मौसम विज्ञान और अंतर-ग्रहीय अन्वेषण जैसे क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के उपग्रहों के लिए नेतृत्व कर रहे हैं। यूआरएससी/इसरो में अपने 35 वर्षों के अनुभव के दौरान, उन्होंने मुख्य रूप से पावर सिस्टम, सैटेलाइट पोजिशनिंग सिस्टम और लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) उपग्रहों, भूस्थैतिक उपग्रहों, नेविगेशन उपग्रहों और बाहरी अंतरिक्ष मिशनों के लिए आरएफ संचार प्रणालियों के क्षेत्रों में योगदान दिया है -जैसे चंद्रयान, मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) और अन्य। साल 1986 में भारतीदासन विश्वविद्यालय, तिरुचिरापल्ली से भौतिकी में मास्टर डिग्री प्राप्त करने के बाद वह इसरो सैटेलाइट सेंटर (आईएसएसी) में शामिल हो गए, जिसे वर्तमान में यूआरएससी के रूप में जाना जाता है।

 

मिशन निदेशक मोहना कुमार

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एस मोहना कुमार चंद्रयान-3 के मिशन निदेशक हैं। वह विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं। चंद्रयान-3 से पहले वह LVM3-M3 मिशन पर वन वेब इंडिया 2 सैटेलाइट के निदेशक थे।

 

लॉन्च ऑथराइजेशन बोर्ड (एलएबी) प्रमुख ए राजराजन

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ए राजराजन एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक हैं और वर्तमान में श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र SHAR के निदेशक हैं। उन्होंने चंद्रयान-3 को कक्षा में स्थापित किया। राजराजन कंपोजिट के क्षेत्र में एक विशेषज्ञ हैं।

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FAQs

चंद्रयान 2 कब लॉन्च किया गया था?

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान-2 के विफल होने के बाद से ही चंद्रयान-3 की तैयारी शुरू कर दी गई थी. 22 जुलाई, 2019 को 14:43 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केन्‍द्र (एस डी एस सी), श्रीहरिकोटा से जी एस एल वी- मार्क-III एम1 द्वारा चंद्रयान-2 लॉन्च किया गया था.