केंद्र सरकार ने जीएसटी (GST) को और सरल बनाने के लिए दो स्लैब की नई प्रणाली (5% और 18%) का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही तंबाकू और पान मसाला जैसे चुनिंदा विलास/हानिकारक उत्पादों (sin goods) पर 40% का विशेष कर लगाया जाएगा। यह प्रस्ताव नेक्स्ट-जेनरेशन जीएसटी सुधारों का हिस्सा है, जिस पर सितंबर या अक्टूबर 2025 में जीएसटी परिषद विचार कर सकती है। यदि मंजूरी मिलती है, तो इसे वित्त वर्ष 2025–26 की तीसरी तिमाही से लागू किया जा सकता है।
यह सुधार उपभोग को बढ़ावा देने, कर विवादों को सुलझाने और अनुपालन को सरल बनाने के साथ-साथ कृषि, वस्त्र, उर्वरक और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को समर्थन देगा।
1. दो मुख्य स्लैब
5% स्लैब – दैनिक उपयोग और सामान्य उपभोक्ता वस्तुएं। वर्तमान में 12% पर आने वाली 99% वस्तुएं यहाँ शिफ्ट होंगी।
18% स्लैब – टीवी, फ्रिज जैसी white goods और आकांक्षी वस्तुएं (जो अभी 28% पर हैं)।
40% दर –लग्जरी वस्तुएं और तंबाकू उत्पादों जैसे हानिकारक सामान पर 40% GST लगेगा।
2. प्रमुख बदलाव
आवश्यक खाद्य वस्तुएं – पहले की तरह शून्य कर (कर-मुक्त)।
मध्यम वर्ग की आकांक्षी वस्तुएं – 28% से घटाकर 18%।
आम उपयोग की वस्तुएं – 12% से घटाकर 5%, ताकि वहनीयता और खपत बढ़ सके।
वर्तमान राजस्व वितरण:
18% स्लैब से – 67%
12% स्लैब से – 5%
5% स्लैब से – 7%
आवश्यक वस्तुओं पर कम दरों से माँग बढ़ेगी, GDP वृद्धि को गति मिलेगी और प्रमुख उद्योगों को समर्थन मिलेगा।
अल्पकालिक राजस्व में कमी संभव है, परंतु अधिक खपत से इसकी भरपाई हो जाएगी।
इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर का समाधान – वस्त्र और उर्वरक जैसे क्षेत्रों में, जहाँ कच्चे माल पर कर तैयार माल से अधिक है।
वर्गीकरण को सरल बनाना – समान वस्तुओं को एक ही स्लैब में रखना (जैसे नमकीन और स्नैक्स), ताकि विवाद और मुकदमेबाज़ी कम हो।
तेज़ पंजीकरण और रिफंड –
95% व्यवसायिक पंजीकरण 3 दिन में पूरा करने का लक्ष्य।
निर्यातकों और इनवर्टेड ड्यूटी वाले व्यवसायों को स्वचालित रिफंड।
प्री-फिल्ड रिटर्न्स – बिलों में ग़लतफ़हमी कम करने और अनुपालन बोझ घटाने के लिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 के स्वतंत्रता दिवस भाषण में घोषणा की थी कि अगली पीढ़ी के GST सुधार दीपावली 2025 तक लागू कर दिए जाएंगे। इनका उद्देश्य है –
GST को आम आदमी के लिए और अनुकूल बनाना।
कृषि, वस्त्र, ऑटोमोबाइल, नवीकरणीय ऊर्जा, हस्तशिल्प, स्वास्थ्य और बीमा जैसे क्षेत्रों की वृद्धि को समर्थन देना।
पुराने जटिल ढाँचे से हटकर सरल और व्यापार-हितैषी प्रणाली की ओर बढ़ना।
चर्चा चरण – सितंबर–अक्टूबर 2025 में GST परिषद की बैठकें।
मंजूरी और क्रियान्वयन – संभवतः FY 2025-26 की तीसरी तिमाही से।
कानून संशोधन की आवश्यकता नहीं – अधिसूचनाओं के माध्यम से लागू किया जा सकता है, जिससे तेजी से कार्यान्वयन संभव होगा।
प्रस्ताव के व्यापक दायरे को देखते हुए परिषद की कई बैठकों की संभावना।
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