केंद्र ने कृषि वानिकी विनियमन को आसान बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने हेतु आदर्श नियमों का अनावरण किया

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने 29 जून 2025 को “कृषि भूमि में पेड़ों की कटाई के लिए मॉडल नियम” जारी किए। यह पहल सतत कृषि, आजीविका संवर्धन, और आग्रोफॉरेस्ट्री (Agroforestry) को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही मंत्रालय ने आगामी नेशनल टिंबर मैनेजमेंट सिस्टम (NTMS) पोर्टल की भी घोषणा की, जो वृक्ष कटाई की मंजूरी प्रक्रिया को डिजिटली सरल बनाएगा।

समाचार में क्यों?

  • 29 जून 2025 को MoEFCC ने कृषि भूमि में पेड़ों की कटाई के लिए मॉडल नियम जारी किए।

  • इसका उद्देश्य राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को आग्रोफॉरेस्ट्री को बढ़ावा देने और प्रक्रिया सरल बनाने में मदद करना है।

  • साथ ही NTMS पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पंजीकरण व अनुमति प्रणाली की शुरुआत की जाएगी।

उद्देश्य

  • आग्रोफॉरेस्ट्री को बढ़ावा देना और खेती में पेड़ों के समावेश को सुविधाजनक बनाना।

  • किसानों की आय बढ़ाने के लिए पेड़ आधारित खेती को व्यावसायिक रूप से लाभकारी बनाना।

  • पारिस्थितिक संतुलन के साथ आर्थिक विकास सुनिश्चित करना।

  • डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी (traceability) को बढ़ाना।

पृष्ठभूमि और आवश्यकता

  • आग्रोफॉरेस्ट्री से मिट्टी की उर्वरता, जल संरक्षण, जैव विविधता और जलवायु सहनशीलता में सुधार होता है।

  • परंतु, किसानों को पेड़ लगाने के बाद कटाई की अनुमति लेने में अत्यधिक नौकरशाही का सामना करना पड़ता था।

  • इससे किसान हतोत्साहित होते थे और खेती में पेड़ लगाने से बचते थे।

मॉडल नियमों की मुख्य विशेषताएं

  • राज्य स्तर पर समितियों का गठन (2016 की वुड-बेस्ड इंडस्ट्रीज गाइडलाइंस के तहत)।

  • NTMS पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण, जिसमें सम्मिलित हैं:

    • भूमि स्वामित्व का प्रमाण

    • खेत की लोकेशन (KML फाइल्स)

    • लगाए गए वृक्षों की प्रजातियां व विवरण

    • जियो-टैग्ड फोटोज

  • ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया द्वारा कटाई की अनुमति के लिए आवेदन।

  • प्रमाणित सत्यापन एजेंसियों द्वारा भौतिक निरीक्षण।

  • वन विभाग के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) इन एजेंसियों की निगरानी करेंगे।

महत्त्व और प्रभाव

  • घरेलू टिंबर (लकड़ी) उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा; आयात पर निर्भरता घटेगी।

  • वुड-बेस्ड इंडस्ट्रीज को स्थायी और ट्रेसेबल कच्चा माल उपलब्ध होगा।

  • निर्यात के नए अवसर खुलेंगे।

  • भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को समर्थन मिलेगा (पेड़ आवरण वृद्धि के माध्यम से)।

  • किसानों को उनकी ज़मीन का टिकाऊ आर्थिक उपयोग करने का अवसर मिलेगा।

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vikash

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