भारतीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रतीक रवीन्द्रनाथ टैगोर की एक कांस्य प्रतिमा (bronze bust) का अनावरण आज बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास परिसर में किया गया। इस मूर्ति का निर्माण प्रसिद्ध चीनी मूर्तिकार युआन शीखुन (Yuan Xikun) ने किया है। यह अनावरण एक सांस्कृतिक संगोष्ठी “संगमम् – भारतीय दार्शनिक परंपराओं का संगम” के अवसर पर किया गया, जो भारत-चीन के सांस्कृतिक संबंधों और साझा सभ्यतागत विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक क्षण रहा।
इस आयोजन का कई स्तरों पर विशेष महत्व रहा —
टैगोर के वैश्विक प्रभाव का सम्मान:
यह प्रतिमा टैगोर के भारत से परे प्रभाव को सम्मानित करती है और चीन के साथ उनके ऐतिहासिक संबंधों को पुनः रेखांकित करती है।
भारत के चीन में राजदूत प्रदीप रावत ने कहा कि “टैगोर की चीन यात्रा एक शताब्दी पहले हमारी सभ्यतागत संवाद की ऐतिहासिक घटना थी।”
भारत-चीन सांस्कृतिक सहयोग का प्रतीक:
चीनी मूर्तिकार युआन शीखुन द्वारा प्रतिमा का निर्माण दोनों देशों के बीच कलात्मक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीकात्मक संकेत है।
संगोष्ठी ‘संगमम्’ का संदर्भ:
इस अनावरण के साथ आयोजित “संगमम्” बौद्धिक संगम का प्रतीक रहा, जिसमें भारतीय दार्शनिक परंपराओं के प्रति वैश्विक संदर्भ में साझा रुचि और समझ को रेखांकित किया गया।
रवीन्द्रनाथ टैगोर का चीन से संबंध लगभग एक शताब्दी पुराना है। उन्होंने बीजिंग, शंघाई और हांगझोउ की यात्राएँ की थीं, जिनसे भारत-चीन सांस्कृतिक संबंधों की नींव मजबूत हुई।
टैगोर के सर्वमानववाद (universal humanism), सांस्कृतिक संवाद, और शिक्षा के माध्यम से समझ बढ़ाने के विचारों ने चीनी साहित्य, कला और शिक्षा-विचार को प्रभावित किया।
उनका दर्शन “विश्वनागरिकता (world citizenship)” और साझा सभ्यतागत विरासत के सिद्धांतों पर आधारित था — वही विचार आज के अनावरण समारोह में पुनः झलकते हैं।
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