
चीन और भूटान अपने लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवादों को सुलझाने की दिशा में काम कर रहे हैं। भूटान के विदेश मंत्री ने अपने चीनी समकक्ष के साथ बातचीत के लिए बीजिंग का दौरा किया, जो बातचीत प्रक्रिया में प्रगति का संकेत है।
ऐतिहासिक विवाद
- चीन का अपने 14 पड़ोसी देशों में से केवल दो – भारत और भूटान – के साथ विवाद है।
- भूटान और चीन के बीच 1980 के दशक से सीमा विवाद चल रहा है, विशेष रूप से जकारलुंग, पासमलुंग और डोकलाम जैसे क्षेत्रों में।
भूटान का रुख
- छोटा राष्ट्र होने के बावजूद भूटान अंतरराष्ट्रीय संबंधों में समानता के सिद्धांत का दृढ़ता से पालन करता है।
- भूटान ‘एक-चीन’ नीति का पालन करता है और चीन के साथ राजनयिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सीमा मुद्दों को सुलझाने का इच्छुक है।
भारत की चिंताएँ
डोकलाम क्षेत्र: डोकलाम वह स्थान है जहां भारत, चीन और भूटान की सीमाएं मिलती हैं।
सुरक्षा महत्व: भारत के लिए, डोकलाम रणनीतिक महत्व रखता है क्योंकि यह भारतीय मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर से जोड़ता है। डोकलाम पर किसी भी चीनी नियंत्रण से भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर को खतरा हो सकता है, जो भारत की कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण है।
भूटान की रणनीति
ट्राई-जंक्शन चर्चा: भूटान का कहना है कि ट्राई-जंक्शन बिंदुओं (भारत, चीन और भूटान को शामिल करते हुए) के बारे में चर्चा केवल तभी हो सकती है जब भारत और चीन अपने सीमा मुद्दों को हल कर लें।
प्रतीक्षा करें और देखें का दृष्टिकोण: भूटान यह देख रहा है कि ट्राइ-जंक्शन बिंदुओं के संबंध में व्यापक वार्ता शुरू करने से पहले भारत और चीन अपने विवादों को कैसे सुलझाते हैं।
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