समुद्री संरक्षण को बनाए रखने के लिए, भारत ने ‘भवसागर’ रेफरल सेंटर को गहरे समुद्र के जीवों के लिए ‘राष्ट्रीय भंडार’ (National Repository) के रूप में नामित किया है। इसकी स्थापना कोच्चि में की गई है, और यह सुविधा भारत के गहरे समुद्र की जैव विविधता को संरक्षित करने और उसका अध्ययन करने का कार्य करेगी। इसे ‘समुद्री जीवित संसाधन और पारिस्थितिकी केंद्र’ (Centre for Marine Living Resources and Ecology) द्वारा विकसित किया गया है, जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। इस पहल का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण और देश की बढ़ती ‘ब्लू इकोनॉमी’ (नीली अर्थव्यवस्था) को सुदृढ़ बनाना है।
भवसागर केंद्र: भारत का नया गहरे समुद्र का जैव विविधता केंद्र
‘भवसागर’ रेफरल केंद्र कोच्चि में स्थित है, और इसे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत आधिकारिक तौर पर मान्यता प्रदान की गई है।
इस मान्यता के साथ, यह केंद्र एक राष्ट्रीय-स्तर के वैज्ञानिक भंडार में तब्दील हो गया है, और अब इसकी ज़िम्मेदारी भारत के गहरे समुद्र में पाए जाने वाले जीव-रूपों को संरक्षित करने और उनका दस्तावेज़ीकरण करने की है।
इस केंद्र के पास पहले से ही 3,500 से अधिक वैज्ञानिक रूप से वर्गीकृत समुद्री नमूने मौजूद हैं, जो इसे देश के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री जैव-विविधता संग्रहों में से एक बनाता है।
इस रिपॉजिटरी को क्या चीज़ अनोखा बनाती है?
भवसागर केंद्र सिर्फ़ एक स्टोरेज सुविधा नहीं है, बल्कि यह गहरे समुद्र के इकोसिस्टम के लिए एक व्यापक रिसर्च और डॉक्यूमेंटेशन हब है।
केंद्र के कलेक्शन में कई तरह की प्रजातियाँ शामिल हैं, जैसे:
- अकशेरुकी जीव, जैसे कि निडेरियन, मोलस्क, आर्थ्रोपोड और एकाइनोडर्म
- कशेरुकी जीव, जिनमें गहरे समुद्र की मछलियाँ शामिल हैं, जैसे कि इलास्मोब्रैंक और टेलीओस्ट
जैव विविधता अधिनियम के तहत मुख्य कार्य
जैव विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के अनुसार, इस रिपॉजिटरी को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
इनमें शामिल हैं:
- जैविक नमूनों के साथ-साथ DNA डेटा का सुरक्षित संरक्षण सुनिश्चित करना
- हाल ही में खोजी गई गहरे समुद्र की प्रजातियों के संरक्षक के रूप में कार्य करना
- और साथ ही वैज्ञानिक अनुसंधान तथा वर्गीकरण (Taxonomy) के विकास में सहायता करना
भारत की ब्लू इकॉनमी और महासागर अनुसंधान को बढ़ावा
- इस केंद्र की स्थापना भारत की ब्लू इकॉनमी को मज़बूत करने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है, जो महासागरीय संसाधनों के सतत उपयोग पर केंद्रित है।
- एम. रविचंद्रन के अनुसार, यह रिपॉजिटरी भारत की गहरे समुद्र में अनुसंधान क्षमताओं को बढ़ाएगी और साथ ही समुद्री संसाधनों के सतत प्रबंधन में भी सहायता करेगी।
- यह संयुक्त राष्ट्र के ‘सतत विकास के लिए महासागर विज्ञान दशक’ (2021-2030) जैसे वैश्विक प्रयासों के अनुरूप है।


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