भारत की बैंकिंग प्रणाली में गुरुवार, 4 जुलाई 2025 को सरप्लस लिक्वि़डिटी (Liquidity Surplus) ₹4 लाख करोड़ के पार पहुंच गया, जो पिछले दो वर्षों में सबसे अधिक है। इस वृद्धि का प्रमुख कारण सरकारी व्यय में तेजी और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा बड़े पैमाने पर अधिशेष ट्रांसफर रहा। इसके अलावा, आरबीआई की सात-दिवसीय वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी को भी बैंकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली, जिससे स्पष्ट होता है कि बैंक अल्पकालिक निवेश में रुचि दिखा रहे हैं। यह स्थिति महत्वपूर्ण है क्योंकि बैंकिंग प्रणाली में अधिक नकदी उपलब्धता का सीधा असर ऋण वितरण, ब्याज दरों और मौद्रिक नीति पर पड़ सकता है। इससे उधार लेना सस्ता हो सकता है और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना भी बनती है।
बैंकिंग प्रणाली में तरलता अधिशेष—यानी बैंकों के पास भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) में जमा अतिरिक्त धनराशि—गुरुवार को ₹4.04 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो कि 19 मई 2022 के बाद से सबसे उच्च स्तर है। इस वृद्धि का मुख्य कारण सरकारी खर्च में तेजी और मई 2025 में आरबीआई द्वारा किए गए रिकॉर्ड ₹2.69 लाख करोड़ के अधिशेष ट्रांसफर को माना जा रहा है। नकदी की इस प्रचुरता के कारण बैंक अब बेहतर ब्याज दरों पर ऋण देने की स्थिति में हैं, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है।
उसी दिन, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 7-दिवसीय वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी आयोजित की, जो बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त धन निकालने का एक उपाय है। इस नीलामी में ₹1.7 लाख करोड़ की बोलियां प्राप्त हुईं, जबकि आरबीआई ने केवल ₹1 लाख करोड़ तक की राशि स्वीकार करने की घोषणा की थी। अंततः आरबीआई ने 5.47% कट-ऑफ दर पर निर्धारित राशि की बोलियां स्वीकार कीं। विशेषज्ञों का मानना है कि बैंक इस प्रकार के अल्पकालिक विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं क्योंकि इससे उन्हें अपनी तरलता को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद मिलती है, साथ ही यह उपाय मौद्रिक नियंत्रण बनाए रखने में भी सहायक है।
हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने कैश रिज़र्व रेशियो (CRR) में 0.50% की कटौती की, जिससे बैंकिंग प्रणाली में लगभग ₹1.16 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी प्रवेश कर गई। सीआरआर वह अनुपात होता है जिसे बैंकों को अपनी जमा राशि का एक हिस्सा अनिवार्य रूप से आरबीआई के पास जमा करना होता है। जब सीआरआर घटाया जाता है, तो बैंकों के पास अधिक धनराशि ऋण देने के लिए उपलब्ध होती है।इस कदम से लोन की दरों में कमी आ सकती है, जिससे उद्यमों और आम लोगों के लिए उधार लेना सस्ता हो सकता है। इससे आने वाले महीनों में क्रेडिट ग्रोथ (ऋण वृद्धि) को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है और आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आ सकती है।
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