भारत के प्रमुख आध्यात्मिक एवं पर्यटन स्थलों में से एक ऋषिकेश अब एक नई स्थापत्य (architectural) पहचान हासिल करने जा रहा है। गंगा नदी पर बन रहा आधुनिक सस्पेंशन ब्रिज “बजरंग सेतु” लगभग तैयार है और दिसंबर 2025 तक इसके खुलने की संभावना है। यह पुल उस ऐतिहासिक लक्ष्मण झूला का स्थान लेगा, जिसे सुरक्षा कारणों से 2019 में बंद कर दिया गया था।
बजरंग सेतु एक आधुनिक सस्पेंशन ब्रिज के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें मजबूती, सुरक्षा और आकर्षक डिज़ाइन का संतुलन रखा गया है।
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| लंबाई | 132 मीटर |
| चौड़ाई | 8 मीटर |
| लागत | ₹60 करोड़ |
| स्थान | पुराने लक्ष्मण झूले के डाउनस्ट्रीम में |
लोक निर्माण विभाग (PWD) के कार्यकारी अभियंता प्रवीण कर्णवाल के अनुसार, लगभग 90% कार्य पूरा हो चुका है, और केवल पैदल मार्गों पर काँच की शीटें लगाने का कार्य बाकी है।
परियोजना दिसंबर 2025 तक पूरी हो जाएगी और अगले वर्ष की शुरुआत में जिला प्रशासन को सौंप दी जाएगी। इसके शुरू होते ही यह ऋषिकेश की आधुनिक अधोसंरचना का नया प्रतीक बन जाएगा।
बजरंग सेतु को उच्च गुणवत्ता वाले स्टील और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक से बनाया गया है। यह पुल बड़ी संख्या में पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहनों का भार सहजता से संभाल सकेगा, जिससे राम झूला जैसे पुराने पुलों पर दबाव कम होगा। इसका डिज़ाइन भूकंप-रोधी (earthquake-resistant) है और सस्पेंशन केबल्स इसे दीर्घकालिक स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करेंगे।
जिस प्रकार लक्ष्मण झूला का धार्मिक महत्व था, उसी प्रकार बजरंग सेतु भी गंगा के उन तटों को जोड़ेगा, जो हिंदू पौराणिक कथाओं और तीर्थ परंपरा में महत्वपूर्ण रहे हैं।
निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा गया है ताकि गंगा नदी के पवित्र प्रवाह और पारिस्थितिकी (ecology) को कोई क्षति न पहुँचे।
निष्कर्ष:
बजरंग सेतु सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि आस्था और आधुनिकता के संगम का प्रतीक है — जो ऋषिकेश को उसके पौराणिक अतीत से जोड़ते हुए, भविष्य की ओर एक सशक्त कदम बढ़ा रहा है।
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