सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (SCG) पर खेले गए पाँचवें एशेज टेस्ट के तीसरे दिन ऑस्ट्रेलिया ने सदी में एक बार देखने लायक प्रदर्शन किया। मेज़बान टीम ने एक ही पारी में 50 या उससे अधिक रनों की सात साझेदारियाँ बनाकर क्रिकेट इतिहास को नया रूप दे दिया—यह उपलब्धि एशेज क्रिकेट में अभूतपूर्व है और टेस्ट क्रिकेट के 134 वर्षों के इतिहास में केवल दूसरी बार हासिल की गई। इस दबदबे भरे प्रदर्शन ने ऑस्ट्रेलिया को श्रृंखला में 4–1 की जीत की ओर मज़बूती से अग्रसर कर दिया और टेस्ट क्रिकेट के सबसे लंबे प्रारूप में उनकी बल्लेबाज़ी क्रम की असाधारण गहराई और निरंतरता को उजागर किया।
इंग्लैंड का पहली पारी का प्रयास कम पड़ गया
इंग्लैंड की पहली पारी का प्रयास नाकाफी रहा। जो रूट की शानदार 160 रनों की पारी के बावजूद इंग्लैंड की टीम 384 रनों पर सिमट गई, जिससे ऑस्ट्रेलिया की आक्रामक बल्लेबाज़ी की नींव पड़ गई। रूट का शतक व्यक्तिगत उत्कृष्टता का प्रतीक था, लेकिन वह ऑस्ट्रेलिया की सामूहिक बल्लेबाज़ी शक्ति को रोकने में अपर्याप्त साबित हुआ। इंग्लैंड के गेंदबाज़ों ने प्रयास तो किया, किंतु वे मेज़बान टीम को अपनी मजबूत स्थिति का लाभ उठाने और श्रृंखला का सबसे प्रभावशाली बल्लेबाज़ी प्रदर्शन खड़ा करने से नहीं रोक सके।
ट्रैविस हेड की तूफानी पारी: मंच तैयार करना
ट्रैविस हेड ने 163 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर ऑस्ट्रेलिया की ऐतिहासिक पारी की दिशा तय की। इंग्लैंड के गेंदबाज़ों पर उनका आक्रामक और निरंतर प्रहार उनकी लय को पूरी तरह तोड़ गया और पहली पारी के बाद किसी भी तरह की वापसी की संभावना समाप्त कर दी। हेड की यह पारी केवल व्यक्तिगत चमक तक सीमित नहीं रही, बल्कि साझेदारियों पर आधारित पूरी पारी की आधारशिला बनी—जो ऑस्ट्रेलिया की सामूहिक बल्लेबाज़ी शक्ति को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
हेड के आक्रामक रवैये ने मध्य सत्रों में भी ऑस्ट्रेलिया की रनगति बनाए रखी, जिससे पहल पूरी तरह उनके हाथों में रही और इंग्लैंड किसी भी सार्थक वापसी की रणनीति नहीं बना सका।
स्टीव स्मिथ का नाबाद शतक: स्थिरता और उत्कृष्टता की मिसाल
ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख बल्लेबाज़ स्टीव स्मिथ ने नाबाद 129 रन बनाकर पारी को मजबूती से संभाला और तीसरे दिन के खेल की समाप्ति तक क्रीज़ पर डटे रहे। यह शतक उनके शानदार करियर का 37वाँ टेस्ट शतक रहा, जिसने आधुनिक क्रिकेट के महान बल्लेबाज़ों में उनकी स्थिति को और सुदृढ़ किया। क्रीज़ पर स्मिथ की मौजूदगी ने पारी को स्थिरता प्रदान की और निरंतर रन जोड़ते हुए दिन के अंतिम सत्रों तक ऑस्ट्रेलिया की दबदबेदार स्थिति बनाए रखी।
उनके नाबाद शतक ने यह भी दर्शाया कि वे विभिन्न मैच परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में कितने सक्षम हैं—जहाँ उन्होंने साझेदारियाँ बनाईं और साथ ही पारी की शुरुआत में ट्रैविस हेड द्वारा स्थापित आक्रामक तेवर को भी बरकरार रखा।
सात 50+ साझेदारियाँ: ऐतिहासिक उपलब्धि
इस कारनामे को क्या चीज़ असाधारण बनाती है?
ऑस्ट्रेलिया की ऐतिहासिक पारी की सबसे बड़ी विशेषता पूरे बल्लेबाज़ी क्रम में दिखाई देने वाली निरंतरता और साझेदारियों की गुणवत्ता रही। मेज़बान टीम ने एक ही पारी में 50 या उससे अधिक रनों की सात साझेदारियाँ जोड़ीं—यह उपलब्धि एशेज क्रिकेट में पहले कभी दर्ज नहीं की गई थी और टेस्ट क्रिकेट के 134 वर्षों के इतिहास में केवल एक बार ही इससे पहले देखने को मिली थी।
ऐतिहासिक संदर्भ
इस उपलब्धि का एकमात्र अन्य उदाहरण 2007 में सामने आया था, जब राहुल द्रविड़ के युग में भारतीय टीम ने द ओवल में सात ऐसी साझेदारियाँ बनाई थीं। इस प्रकार, सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया का यह प्रदर्शन टेस्ट क्रिकेट इतिहास में किसी टीम द्वारा हासिल की गई दूसरी ऐसी असाधारण बल्लेबाज़ी निरंतरता बन गया।
संपूर्ण विश्लेषण
ऑस्ट्रेलिया की साझेदारियों ने बल्लेबाज़ी क्रम के विभिन्न स्थानों पर गहराई को दर्शाया। केवल एक साझेदारी 50 से कम रही—एलेक्स कैरी और स्टीव स्मिथ के बीच 27 रनों की साझेदारी—जबकि शेष छह साझेदारियाँ 50 से अधिक रनों की रहीं। सलामी बल्लेबाज़ों से लेकर मध्य क्रम और निचले क्रम तक फैला यह योगदान ऑस्ट्रेलिया की सामूहिक बल्लेबाज़ी की असाधारण गुणवत्ता और निरंतरता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है।
एशेज रिकॉर्ड बुक में बदलाव: 134 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा
पिछला बेंचमार्क
एशेज इतिहास में इससे पहले किसी भी टीम ने एक पारी में सात अर्धशतकीय साझेदारियाँ नहीं बनाई थीं। इंग्लैंड द्वारा 1892 में एडिलेड में बनाई गई छह साझेदारियाँ एक सदी से अधिक समय तक मानक बनी रहीं और एशेज क्रिकेट में बल्लेबाज़ी की निरंतरता का स्वर्णिम उदाहरण मानी जाती थीं।
ऑस्ट्रेलिया की ऐतिहासिक उपलब्धि
सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया के प्रदर्शन ने न केवल इस 134 वर्ष पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त किया, बल्कि यह भी दिखाया कि उनकी बल्लेबाज़ी लंबे समय तक लगातार दबाव बनाने में कितनी सक्षम है। कई 50+ साझेदारियाँ गढ़ने की क्षमता ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज़ी क्रम की गहराई को उजागर करती है और यह सिद्ध करती है कि टीम किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर हुए बिना भी लंबी पारियाँ खड़ी कर सकती है।
यह ऐतिहासिक उपलब्धि ऑस्ट्रेलिया को श्रृंखला को पूरी मजबूती से समाप्त करने की अत्यंत सशक्त स्थिति में ले आती है और 4–1 की दबदबे भरी जीत की प्रबल संभावना को जन्म देती है।
मैच की स्थिति: ऑस्ट्रेलिया का पूर्ण नियंत्रण
तीसरे दिन का खेल समाप्त होने तक ऑस्ट्रेलिया की स्थिति बेहद मज़बूत और लगभग अजेय थी। पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया ने 7 विकेट पर 529 रन बनाए, जबकि इंग्लैंड की टीम 384 रन पर सिमट गई। इस तरह ऑस्ट्रेलिया को 134 रनों की बढ़त हासिल हुई, साथ ही उसके पास अभी भी तीन विकेट शेष हैं। श्रृंखला में ऑस्ट्रेलिया पहले ही 3–1 से आगे है और खेलने के लिए केवल एक टेस्ट बाकी है। इतनी मजबूत पहली पारी की बढ़त और उपलब्ध बल्लेबाज़ी संसाधनों के चलते ऑस्ट्रेलिया अब टेस्ट मैच के शेष हिस्से की दिशा तय करने की अत्यंत सशक्त स्थिति में है।
टेस्ट क्रिकेट का परिचय: संदर्भ को समझें
एशेज ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेली जाने वाली सबसे प्रतिष्ठित टेस्ट क्रिकेट श्रृंखला है, जिसका आयोजन बारी-बारी से दोनों देशों में किया जाता है। क्रिकेट का सबसे लंबा प्रारूप टेस्ट क्रिकेट वर्ष 1877 में शुरू हुआ था, जिससे यह 145 वर्षों से भी अधिक पुराना खेल बन चुका है। स्वयं एशेज श्रृंखला की शुरुआत 1882 में हुई थी और यह खेल जगत की सबसे महान एवं ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विताओं में से एक का प्रतीक मानी जाती है।
परीक्षा-उन्मुख सारांश: महत्वपूर्ण तथ्य
प्रतियोगी परीक्षाओं एवं क्रिकेट सामान्य ज्ञान के लिए प्रमुख बिंदु—
- ऐतिहासिक उपलब्धि: एक टेस्ट पारी में 7 बार 50+ रनों की साझेदारियाँ
- पिछला रिकॉर्ड: 6 साझेदारियाँ (इंग्लैंड, एडिलेड, 1892)
- रिकॉर्ड अवधि: 134 वर्ष
- एकमात्र अन्य उदाहरण: भारत, 2007, द ओवल
- प्रमुख खिलाड़ी:
- ट्रैविस हेड – 163 रन
- स्टीव स्मिथ – 129* रन
- जो रूट – 160 रन
- मैच स्थल: सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (SCG)
- श्रृंखला स्थिति: ऑस्ट्रेलिया 3–1 से आगे
- संभावित परिणाम: ऑस्ट्रेलिया की 4–1 से श्रृंखला जीत
- टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत: 1877
- एशेज श्रृंखला: 1882 से, ऑस्ट्रेलिया बनाम इंग्लैंड की ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता


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