असम सरकार के विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि बहुविवाह को दंडनीय अपराध माना जाएगा और इसके दोषी को कानून के अनुसार सात वर्ष तक के कारावास और जुर्माने की सजा हो सकती है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने यह विधेयक 2023 में किए गए अपने वादे को पूरा करते हुए प्रस्तुत किया। यह कदम उन प्रभावित महिलाओं की स्थिति को देखते हुए उठाया गया है जिनके जीवन में बहुविवाह के कारण कठिनाइयाँ आईं। 2023 में राज्यव्यापी सर्वेक्षण के बाद सरकार को ऐसा कानून लाने की जरूरत महसूस हुई थी।
किसी व्यक्ति द्वारा एक वैध विवाह चलते हुए दूसरी शादी करना, जब तक पहला विवाह कानूनी रूप से समाप्त न हुआ हो।
अधिकतम 7 वर्ष की कैद
अदालत द्वारा निर्धारित जुर्माना
अधिकतम 10 वर्ष की कैद
जुर्माना (विधेयक में राशि निर्दिष्ट नहीं)
पहले अपराध के दंड की तुलना में दोगुनी सज़ा
बहुविवाह से पीड़ित महिलाओं को मुआवज़ा देने का प्रावधान
बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन
करबी आंगलोंग
दीमा हसाओ
इन क्षेत्रों में विशेष स्वशासन होने के कारण कानून लागू नहीं होगा।
संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत सूचीबद्ध ST समुदाय इस कानून के दायरे से बाहर होंगे।
यदि असम का कोई निवासी कानून लागू होने के बाद राज्य के बाहर बहुविवाह करता है, तो उस पर भी यह कानून लागू होगा।
यदि कोई व्यक्ति बहुविवाह में मदद करता है, छुपाता है, या भाग लेता है — जैसे:
गांव प्रमुख
क़ाज़ी
माता-पिता या अभिभावक
तो उसे मिल सकती है—
2 वर्ष तक की कैद
₹1 लाख तक जुर्माना
जो व्यक्ति यह जानते हुए भी बहुविवाह की शादी करवाता/संपन्न करता है:
2 वर्ष तक की कैद
₹1.5 लाख तक जुर्माना
दोषी पाए जाने पर व्यक्ति:
सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य होगा
राज्य की किसी भी लाभकारी योजना से वंचित रहेगा
स्थानीय निकाय चुनाव नहीं लड़ सकेगा, जैसे—
पंचायत चुनाव
नगर निकाय चुनाव
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विधेयक का नाम | असम बहुविवाह निषेध विधेयक, 2025 |
| प्रस्तुतकर्ता | मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा |
| पेश करने की तारीख | 25 नवंबर 2025 |
| पहली बार अपराध | अधिकतम 7 वर्ष कैद |
| विवाह छुपाने पर | अधिकतम 10 वर्ष कैद |
| दोबारा अपराध | पिछली सज़ा से दोगुनी |
| छूट वाले क्षेत्र | छठी अनुसूची क्षेत्र |
| छूट वाली समुदाय | अनुसूचित जनजातियाँ (अनुच्छेद 342) |
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