अरुणाचल प्रदेश के लेपराडा जिले में यूथालिया मलक्काना (Euthalia malaccana) की पुष्टि के साथ भारत के तितली परिवार में एक उल्लेखनीय नया सदस्य जुड़ गया है। पहले इसे एक उप-प्रजाति या दक्षिण-पूर्व एशिया तक सीमित माना जाता था, लेकिन भारत में इस तितली प्रजाति की निश्चित उपस्थिति इंडो-ऑस्ट्रेलियाई क्षेत्र में यूथालिया मलक्काना की ज्ञात सीमा का विस्तार करती है। व्यापक फील्डवर्क और फोटोग्राफिक दस्तावेज़ीकरण के माध्यम से सत्यापित यह खोज पूर्वोत्तर क्षेत्र के जैव विविधता रिकॉर्ड को समृद्ध करती है और वन्यजीव अनुसंधान में नागरिक विज्ञान के महत्व को उजागर करती है।
अरुणाचल प्रदेश के लेपरादा ज़िले में Euthalia malaccana तितली की पुष्टि ने भारत में तितलियों की विविधता के दायरे को बढ़ा दिया है। वर्षों से इसकी भारत में उपस्थिति को लेकर संदेह था, लेकिन अब यह खोज कीटविज्ञान (entomology), संरक्षण, और जैव विविधता अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट बन गई है। यह खोज नागरिक विज्ञान (citizen science) की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करती है।
Euthalia malaccana को पहले Euthalia adonia की उप-प्रजाति माना जाता था, लेकिन अब इसे एक स्वतंत्र प्रजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
यह तितली आमतौर पर दक्षिण-पूर्व एशिया में पाई जाती है — जैसे कि उत्तरी थाईलैंड, मलय प्रायद्वीप, और सुंडा द्वीपसमूह।
भारत में इसकी उपस्थिति पहले अनिश्चित मानी जाती थी, जिसे अब इस खोज ने प्रमाणित कर दिया है।
इस तितली को अरुणाचल प्रदेश के लेपरादा जिले के मुख्यालय बसर (लगभग 685 मीटर की ऊँचाई पर) में देखा गया।
पुलिसकर्मी और नागरिक वैज्ञानिक रोशन उपाध्याय और लखनऊ की नागरिक विज्ञान विशेषज्ञ तसलीमा शेख ने स्थानीय मार्गदर्शकों की मदद से दूरस्थ क्षेत्रों में फील्डवर्क किया।
2023 और 2024 के बीच इस प्रजाति के पाँच तितलियों को देखा और प्रलेखित किया गया।
यह शोध SHILAP Revista de Lepidopterología नामक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशित हुआ।
नर तितलियों के अग्रपंखों पर नीले रंग के विशिष्ट धब्बे होते हैं, जबकि मादा में ये धब्बे बड़े होते हैं।
पिछले पंखों पर लाल धब्बों की कमी होती है, जो इसे Euthalia lubentina जैसी संबंधित प्रजातियों से अलग करता है।
पहचान की पुष्टि फोटोग्राफिक प्रमाण और वैज्ञानिक साहित्य की तुलना से की गई।
इस रिकॉर्ड से Euthalia malaccana की भौगोलिक सीमा अब भारत तक विस्तृत हो गई है।
यह पूर्वोत्तर भारत में Papilionoidea (तितली सुपरफैमिली) की विविधता की समझ को समृद्ध करता है।
यह खोज नागरिक विज्ञान की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
अरुणाचल प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में संरक्षण नीति निर्माण के लिए यह डेटा महत्वपूर्ण है।
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