अरुणाचल प्रदेश स्थापना दिवस 2026 (Arunachal Pradesh Foundation Day 2026) 20 फरवरी को मनाया जाएगा। यह दिन वर्ष 1987 में अरुणाचल प्रदेश के भारत के 24वें राज्य के रूप में गठन की स्मृति में मनाया जाता है। “उगते सूरज की भूमि” (Land of the Rising Sun) के नाम से प्रसिद्ध अरुणाचल प्रदेश भारत का वह पहला क्षेत्र है जहाँ सबसे पहले सूर्य की किरणें पहुँचती हैं। देश के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित यह राज्य भूटान, चीन और म्यांमार के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ साझा करता है। अरुणाचल प्रदेश स्थापना दिवस 2026 राज्य के सामरिक महत्व, सांस्कृतिक विविधता और केंद्र शासित प्रदेश से पूर्ण राज्य बनने की ऐतिहासिक यात्रा को रेखांकित करता है।
अरुणाचल प्रदेश स्थापना दिवस 2026: तिथि और परिचय
- तिथि: शुक्रवार, 20 फरवरी 2026
- यह दिन 1987 में केंद्र शासित प्रदेश से पूर्ण राज्य बनने की स्मृति में मनाया जाता है।
- राजधानी: ईटानगर
- वर्तमान में राज्य में 26 जिले हैं।
इस अवसर पर आधिकारिक समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम, परेड और जनसभाएँ आयोजित की जाती हैं, जिनमें राज्य की विरासत और उपलब्धियों का उत्सव मनाया जाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
प्रमुख घटनाएँ
- 1826: यांडाबू की संधि के बाद प्रथम आंग्ल-बर्मी युद्ध के पश्चात क्षेत्र ब्रिटिश नियंत्रण में आया।
- 1914: शिमला समझौते के तहत तिब्बत और नेफा (NEFA) के बीच मैकमोहन रेखा निर्धारित की गई।
- 1947: स्वतंत्रता के बाद नेफा असम प्रशासन के अधीन आया।
- 1972: नेफा का नाम बदलकर अरुणाचल प्रदेश रखा गया और इसे केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला।
- 1987: 55वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1986 के तहत “अरुणाचल प्रदेश राज्य अधिनियम” के माध्यम से यह भारत का 24वां राज्य बना।
यह परिवर्तन प्रशासनिक विकास और राजनीतिक आकांक्षाओं की लंबी प्रक्रिया का परिणाम था।
स्थापना दिवस का महत्व
- अरुणाचल प्रदेश स्थापना दिवस गर्व और आत्मचिंतन का दिन है।
- यह स्वशासन के लिए लोगों के संघर्ष और आकांक्षाओं का सम्मान करता है।
- आधारभूत संरचना, शिक्षा, पर्यटन और संपर्क क्षेत्र में हुई प्रगति का उत्सव मनाता है।
- अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के कारण राज्य भारत की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- यह विविध जनजातीय समुदायों के बीच एकता को मजबूत करता है।
सांस्कृतिक उत्सव और परंपराएँ
- इस दिन राज्य की 26 प्रमुख जनजातियों और 100 से अधिक उप-जनजातियों की समृद्ध संस्कृति प्रदर्शित की जाती है।
- पारंपरिक नृत्य और लोक संगीत
- सांस्कृतिक प्रदर्शनी
- विकास संबंधी उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर भाषण
- राज्य के प्रमुख त्योहार जैसे लोसार, सोलुंग, और न्योकुम इसकी जीवंत सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं।
- यह उत्सव अरुणाचल प्रदेश की पहचान को एक सांस्कृतिक रूप से विविध और प्राकृतिक संपदा से समृद्ध राज्य के रूप में सुदृढ़ करता है।


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